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बलरामपुर के जिला मिशन समन्वयक चंद्रभूषण प्रसाद निलंबित, स्थानांतरण नीति से लेकर वित्तीय अनियमितता तक के आरोप

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लोक शिक्षण संचालनालय का बड़ा एक्शन; कर्मचारियों के संलग्नीकरण और छात्रावास प्रभार में बदलाव पर उठे सवाल, सरगुजा संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय होगा निलंबन अवधि का मुख्यालय

बलरामपुर-रामानुजगंज/रामहरि गुप्ता। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा के पद पर कार्यरत चंद्रभूषण प्रसाद को लोक शिक्षण संचालनालय ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। 28 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में शासन की स्थानांतरण नीति के उल्लंघन, कर्मचारियों के नियमविरुद्ध संलग्नीकरण, छात्रावास के प्रभार में बदलाव और वित्तीय अनियमितता जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख किया गया है।

सवाल सिर्फ निलंबन का नहीं, बल्कि उन प्रशासनिक फैसलों का भी है, जिन्हें लेकर संचालनालय ने आपत्ति दर्ज की है। हालांकि, निलंबन आदेश में दर्ज आरोपों को अंतिम रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। इनकी वास्तविक स्थिति विभागीय जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण से स्पष्ट होगी।

छात्रावास के प्रभार में बदलाव बना कार्रवाई का आधार

लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश में जिला मिशन समन्वयक के कार्यकाल के दौरान छात्रावास के प्रभार में किए गए बदलाव का उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 के कार्यालयीन पत्र के माध्यम से श्रीमती आशा पन्ना को 50 सीटर छात्रावास लरंगी, रामचंद्रपुर में पदस्थापना संबंधी आदेश जारी किए जाने का हवाला दिया गया है।

इसके बावजूद श्रीमती निर्मला जायसवाल, प्रधानपाठक, प्राथमिक शाला लुरगी, रामचंद्रपुर को 50 सीटर छात्रावास लुरगी का प्रभार सौंपे जाने की बात आदेश में दर्ज है। संचालनालय ने प्रभार परिवर्तन के लिए कारण नहीं बताए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।

अब इस मामले में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभार परिवर्तन किन परिस्थितियों में किया गया, इसके पीछे क्या प्रशासनिक आधार था और संबंधित आदेशों का पालन किस स्तर पर किया गया।

स्थानांतरण नीति के उल्लंघन का आरोप

निलंबन आदेश में सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के 5 जून 2025 को जारी परिपत्र का हवाला दिया गया है। इसमें स्थानांतरण नीति और कर्मचारियों के संलग्नीकरण से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है।

संचालनालय के अनुसार, संबंधित नीति के विपरीत कर्मचारियों का संलग्नीकरण किया गया और शासन के निर्धारित अधिकारों का अतिक्रमण करते हुए स्वेच्छाचारिता बरती गई। इसी को कार्रवाई के प्रमुख आधारों में शामिल किया गया है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कर्मचारियों का संलग्नीकरण और पदस्थापना संबंधी निर्णय सीधे विभागीय प्रशासन तथा संस्थानों की कार्यप्रणाली से जुड़े होते हैं। ऐसे निर्णयों में निर्धारित नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति का पालन किया जाना आवश्यक है।

वित्तीय अनियमितता का भी उल्लेख, लेकिन विवरण सार्वजनिक नहीं

निलंबन आदेश में चंद्रभूषण प्रसाद पर वित्तीय अनियमितता का आरोप भी दर्ज किया गया है। आदेश में उनके कथित कृत्यों को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत बताया गया है।

हालांकि, आदेश में किसी विशेष वित्तीय लेनदेन, कथित राशि, भुगतान या खरीद प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है। इसलिए इस स्तर पर वित्तीय अनियमितता की प्रकृति अथवा आर्थिक नुकसान की राशि के संबंध में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

अब यह देखना अहम होगा कि विभागीय जांच में वित्तीय अनियमितता से जुड़े कौन-कौन से दस्तावेज और तथ्य सामने आते हैं तथा इस संबंध में क्या निष्कर्ष निकाला जाता है।

नियम 1966 के तहत निलंबन, सरगुजा में रहेगा मुख्यालय

लोक शिक्षण संचालनालय ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के उपनियम (1)(क) के अंतर्गत चंद्रभूषण प्रसाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है।

आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग सरगुजा निर्धारित किया गया है। इस अवधि में वे नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता पाने के पात्र होंगे।

निलंबन आदेश की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव, समग्र शिक्षा राज्य परियोजना कार्यालय के प्रबंध संचालक, सरगुजा संभाग के संभागायुक्त, बलरामपुर-रामानुजगंज के कलेक्टर तथा संबंधित शिक्षा अधिकारियों को भेजी गई है।

अब विभागीय जांच पर टिकी निगाहें

जिला मिशन समन्वयक जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत अधिकारी के विरुद्ध हुई इस कार्रवाई ने कर्मचारियों के संलग्नीकरण, छात्रावासों के प्रभार में बदलाव और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं को चर्चा में ला दिया है।

अब आगे की प्रक्रिया में तीन सवाल महत्वपूर्ण होंगे—छात्रावास का प्रभार बदलने का आधार क्या था, संलग्नीकरण के मामले में किन नियमों का उल्लंघन हुआ और वित्तीय अनियमितता के आरोपों के समर्थन में विभागीय जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं?

फिलहाल, लोक शिक्षण संचालनालय का निलंबन आदेश जारी हो चुका है। आरोपों की अंतिम स्थिति जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगी। संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने पर खबर को उसमें शामिल तथ्यों के साथ अद्यतन किया जा सकेगा।

अब देखना होगा कि विभागीय जांच इन आरोपों पर क्या तस्वीर सामने लाती है और शिक्षा विभाग प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आगे क्या कदम उठाता है।

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Author: Man Tantra 24

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