दूसरे राज्यों से धान लाकर समर्थन मूल्य पर खपाने की कोशिशों पर रहेगी नजर, कोचियों-बिचौलियों से लेकर राइस मिलों और खरीदी केंद्रों तक जांच के निर्देश
रायपुर | 24 अक्टूबर 2026/सुनील शर्मा
छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के दौरान धान खरीदी को लेकर शासन ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने की तैयारी की है। दूसरे राज्यों से धान लाकर प्रदेश के खरीदी केंद्रों में समर्थन मूल्य पर बेचने की आशंका को देखते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 21 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के तहत जिलों में विशेष चेकिंग दल गठित करने, सीमावर्ती क्षेत्रों में धान की आवक पर नजर रखने, कोचियों-बिचौलियों की पहचान करने और खरीदी केंद्रों के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बार निगरानी केवल धान के परिवहन तक सीमित नहीं रहेगी। राइस मिलों में उपलब्ध धान के स्टॉक, बिजली की खपत, मिलिंग के बाद जमा होने वाले चावल और सरकारी उचित मूल्य दुकानों में चावल की उपलब्धता की भी जांच की जाएगी। इसका उद्देश्य धान खरीदी व्यवस्था में संभावित अनियमितताओं और धान-चावल के पुनर्चक्रण पर नियंत्रण करना है।
सीमावर्ती जिलों पर विशेष नजर, कलेक्टर की अध्यक्षता में बनेंगे जांच दल

शासन के निर्देश के अनुसार, प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में विशेष चेकिंग दल गठित किया जाएगा। इसमें राजस्व, खाद्य, सहकारिता, परिवहन, वन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को शामिल किया जा सकेगा।
आवश्यकता के अनुसार चेक पोस्टों की संख्या बढ़ाने और नियमित जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं। दूसरे राज्यों से आने वाले धान के परिवहन पर नजर रखी जाएगी। अवैध परिवहन या नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बलरामपुर-रामानुजगंज जैसे सीमावर्ती जिलों के लिए यह व्यवस्था विशेष महत्व रखती है, क्योंकि यहां धान की अंतरराज्यीय आवाजाही पर निगरानी का सीधा संबंध खरीदी व्यवस्था की पारदर्शिता से है। हालांकि, इन निर्देशों के जमीनी क्रियान्वयन और स्थानीय स्तर पर होने वाली कार्रवाई की जानकारी सामने आना अभी बाकी है।
15 नवंबर से लागू होगी निर्धारित अवधि की व्यवस्था
विभागीय आदेश में उल्लेख किया गया है कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में 15 नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक दूसरे राज्यों से धान का आयात निर्धारित अनुमति के अनुसार ही किया जा सकेगा।
आदेश के मुताबिक, सुपर फाइन किस्म का धान यदि 3,300 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक लागत पर खरीदा गया हो, तो उसके आयात के लिए संचालक, खाद्य की अनुमति आवश्यक होगी। आयातक को धान की आवक की सूचना संबंधित जिला खाद्य अधिकारी को भी देनी होगी।
इस व्यवस्था के जरिए धान की आवक और उसके स्रोत पर निगरानी रखने का प्रयास किया जाएगा, ताकि दूसरे राज्यों से लाए गए धान को नियमों के विरुद्ध समर्थन मूल्य पर बेचने की कोशिशों को रोका जा सके।
कोचियों और बिचौलियों की गतिविधियों पर रहेगी नजर
धान खरीदी शुरू होने से पहले मंडी अधिकारियों को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सक्रिय कोचियों एवं बिचौलियों की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी जानकारी संबंधित समितियों और अधिकारियों के साथ साझा की जाएगी।
शासन ने ऐसी संभावित अनियमितताओं पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, जिनमें कोई व्यक्ति किसानों से धान खरीदकर दूसरे किसान के पंजीयन के माध्यम से उसे खरीदी केंद्र में बेचने का प्रयास करता है। ऐसे मामलों में वाहन और धान जब्त करने सहित नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचे और किसी दूसरे स्रोत से लाए गए धान को किसान के पंजीयन की आड़ में खपाने की गुंजाइश न रहे।
धान की आवाजाही पर नजर रखेंगे ट्रैकिंग सिस्टम
खरीदी केंद्रों से राइस मिलों तक धान पहुंचाने की प्रक्रिया पर भी निगरानी बढ़ाई जाएगी। शासन ने परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों को संबंधित पोर्टल से जोड़ने और उनमें लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाने के निर्देश दिए हैं।
इससे धान के परिवहन की गतिविधियों पर नजर रखने और निर्धारित मार्ग तथा व्यवस्था से जुड़ी संभावित अनियमितताओं की जांच करने में मदद मिलेगी।
धान के पुनर्चक्रण की आशंका को देखते हुए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुनर्चक्रण से आशय ऐसी संभावित गतिविधियों से है, जिनमें पहले से खरीदे या उपलब्ध धान को अलग-अलग माध्यमों से दोबारा सरकारी खरीदी व्यवस्था में खपाने की कोशिश की जाती है।
राइस मिलों में स्टॉक, बिजली खपत और चावल के रिकॉर्ड की होगी जांच
शासन ने राइस मिलों की निगरानी के लिए स्टॉक और बिजली खपत के आंकड़ों का मिलान करने पर जोर दिया है। सभी चावल मिलों की मासिक बिजली खपत तथा प्रत्येक माह जमा किए जाने वाले केंद्रीय पूल चावल (सीएमआर) का विवरण पोर्टल पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मिलों में मौजूद सरकारी और निजी धान के स्टॉक का रिकॉर्ड भी संधारित किया जाएगा। मिलिंग के बाद उपलब्ध चावल और बिजली की खपत के आंकड़ों के बीच उचित सामंजस्य की जांच की जाएगी।
इससे यह आकलन करने में सहायता मिलेगी कि मिलों में उपलब्ध धान की मात्रा, मिलिंग गतिविधियां और जमा किए गए चावल के रिकॉर्ड आपस में मेल खाते हैं या नहीं। किसी तरह की विसंगति सामने आने पर संबंधित नियमों के तहत जांच और कार्रवाई की जा सकेगी।
हर खरीदी केंद्र का होगा भौतिक सत्यापन
धान खरीदी केंद्रों में स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जांच के लिए अधिकारियों को नामांकित किया जाएगा। ये अधिकारी एप के माध्यम से खरीदी केंद्र पहुंचकर धान और बारदानों का भौतिक सत्यापन करेंगे।
निर्देशों के अनुसार, समितियों में सोमवार से शुक्रवार तक, शासकीय अवकाश को छोड़कर, धान खरीदी की जाएगी। प्रत्येक शनिवार को सप्ताह के दौरान खरीदे गए धान की मात्रा, बारदानों के उपयोग और धान उठाव के लिए समिति को प्राप्त राशि के व्यय की पुष्टि की जाएगी।
इस काम में सहकारी केंद्रीय बैंक, अपेक्स बैंक, सहकारिता, खाद्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जा सकेगी।
यदि खरीदी केंद्र के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में अंतर मिलता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। धान के असामान्य या अव्यवस्थित ढंग से रखे होने की स्थिति में भी जांच होगी। जरूरत पड़ने पर नमी मापने वाले उपकरणों से धान की जांच कर उसकी गुणवत्ता और वास्तविक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा।
राशन दुकानों के चावल की रिसाइक्लिंग पर भी निगरानी
शासन ने सरकारी उचित मूल्य दुकानों में उपलब्ध चावल के स्टॉक की समय-समय पर जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।
आदेश में आशंका जताई गई है कि राशनकार्डधारियों को आवंटित चावल को दोबारा खरीदी या मिलिंग व्यवस्था में खपाने की कोशिश हो सकती है। इस तरह की संभावित गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उचित मूल्य दुकानों के स्टॉक का सत्यापन किया जाएगा और अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
इससे धान खरीदी, मिलिंग और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बीच होने वाली चावल की आवाजाही पर निगरानी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
अवैध परिवहन और अनियमितताओं के मामलों की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी
शासन ने धान खरीदी के दौरान अवैध बिक्री, अवैध परिवहन और अन्य अनियमितताओं से जुड़े दर्ज प्रकरणों की जानकारी जिला स्तर से मुख्यालय तक भेजने के निर्देश दिए हैं।
खाद्य नियंत्रक और खाद्य अधिकारी मंडल स्तर पर दर्ज मामलों की जानकारी साझा करेंगे। इससे अलग-अलग जिलों में सामने आने वाले मामलों की समीक्षा और कार्रवाई की स्थिति पर निगरानी रखी जा सकेगी।
अब निगाहें जमीनी कार्रवाई पर
राज्य शासन के इन निर्देशों से आगामी धान खरीदी सीजन में जिला प्रशासन, खाद्य विभाग, मंडी, सहकारिता और परिवहन विभाग की जिम्मेदारी बढ़ने वाली है। सीमावर्ती क्षेत्रों में धान की आवक, कोचियों-बिचौलियों की गतिविधियां, खरीदी केंद्रों के स्टॉक और राइस मिलों के रिकॉर्ड की जांच इस व्यवस्था के प्रमुख हिस्से होंगे।
लेकिन असली परीक्षा निर्देश जारी होने के बाद शुरू होगी। विशेष चेकिंग दल कितनी नियमितता से जांच करते हैं, संदिग्ध परिवहन पर क्या कार्रवाई होती है और खरीदी केंद्रों में स्टॉक का सत्यापन किस तरह किया जाता है—इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।
Author: Man Tantra 24









