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शिक्षा विभाग में बड़ा खेल: सरकार के सख्त बैन के बाद भी BEO और ABEO कुर्सी पर जमे, RTI लगते ही मचा हड़कंप

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वाड्रफनगर शिक्षा विभाग में बड़ा खेल: सरकार के सख्त बैन के बाद भी BEO और ABEO कुर्सी पर जमे, RTI लगते ही मचा हड़कंप

वाड्रफनगर (बलरामपुर-रामानुजगंज): छत्तीसगढ़ शासन और स्कूल शिक्षा विभाग के कड़े निर्देशों को ताक पर रखकर वाड्रफनगर विकासखंड शिक्षा कार्यालय में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रदेशभर में शिक्षकों और अधिकारियों के अटैचमेंट (संलग्नीकरण) को पूरी तरह समाप्त करने के सरकारी आदेश के बावजूद वाड्रफनगर में ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (BEO) और असिस्टेंट ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (ABEO) दोनों ही मजे से अटैचमेंट पर कुर्सियां संभाले बैठे हैं। अब इस पूरे मामले में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज तलब किए जाने से शिक्षा विभाग के गलियारों में खलबली मच गई है।

RTI के दो तीखे सवालों ने घेरा शिक्षा विभाग

शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला धनजारा के शिक्षक सुरेंद्र सिंह परस्ते ने जन सूचना अधिकारी सह जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय में RTI आवेदन लगाकर विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल दागे हैं:

  1. शासन के आदेशों की प्रति: छत्तीसगढ़ शासन और संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) रायपुर द्वारा अटैचमेंट समाप्ति को लेकर जारी किए गए समस्त आदेशों की प्रमाणित प्रति।
  2. कुर्सी पर टिके रहने का आधार: जब पूरे प्रदेश में संलग्नीकरण खत्म हो चुका है, तो वाड्रफनगर में वर्तमान BEO और ABEO किस आदेश और अधिकार से अटैचमेंट पर कार्यरत हैं? क्या इसके लिए DPI रायपुर या संयुक्त संचालक (JD) सरगुजा से कोई विशेष अनुमति ली गई है? यदि हां, तो उसकी प्रमाणित प्रति पेश की जाए।

जब रायपुर से लेकर जिले तक सब निरस्त, तो वाड्रफनगर पर मेहरबानी क्यों?

स्कूल शिक्षा मंत्री के सख्त रुख और समीक्षा बैठकों के बाद DPI रायपुर ने 25 जून 2026 को स्पष्ट आदेश जारी कर प्रदेश में सभी प्रकार के अटैचमेंट तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश दिए थे। इसके पालन में जिला शिक्षा अधिकारी बलरामपुर ने जिले के सभी अटैचमेंट खत्म कर शिक्षकों व अधिकारियों को उनकी मूल पदस्थापना वाली संस्थाओं में वापस भेज दिया था।

ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब पूरे जिले के लिए एक नियम लागू हुआ, तो वाड्रफनगर ब्लॉक में BEO और ABEO के लिए अलग नियम कैसे चल रहा है? विभागीय जानकारों के मुताबिक, यदि इस संबंध में संयुक्त संचालक (JD) स्तर से कोई अनुमति दी भी गई हो, तो वह DPI के केंद्रीय आदेश के सामने स्वतः प्रभावहीन हो जाती है।

जांच दबाने का खेल? SDM के आदेश को बीते 90 दिन, रिपोर्ट अब तक लापता

यह लापरवाही सिर्फ विभागीय स्तर तक सीमित नहीं है। स्थानीय सरपंच द्वारा जनदर्शन में उठाई गई शिकायत पर एसडीएम (SDM) वाड्रफनगर ने 22 जुलाई 2026 (आदेश क्रमांक 830) को महकमे से महज 2 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट तलब की थी। हैरानी की बात यह है कि इस आदेश को 3 महीने (90 दिन) से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

क्या मंत्रालय तक पहुंचेगी गूंज?

प्रशासनिक संरक्षण और नियमों की अनदेखी के बीच अब RTI के जरिए मांगी गई जानकारी ने विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि क्या जिला प्रशासन निष्पक्ष कदम उठाते हुए दोनों अधिकारियों को उनके मूल पद पर भेजेगा, या फिर नियमों को ताक पर रखने का यह मामला राज्य मंत्रालय तक पहुंचेगा।

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Author: Man Tantra 24

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