कार्यभार ग्रहण करने के अल्टीमेटम को किया नजरअंदाज, राजस्व और न्यायालयीन कार्य प्रभावित होने पर SDM ने जारी किए निलंबन आदेश | हड़ताल के बाद प्रशासन की सख्ती से मचा हड़कंप
वाड्रफनगर/रामहरि गुप्ता। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में राजस्व विभाग के भीतर प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। वाड्रफनगर और रघुनाथनगर तहसील में पदस्थ पांच पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। कार्यभार ग्रहण करने के लिए बार-बार नोटिस जारी होने के बावजूद ड्यूटी पर नहीं लौटने और शासकीय कार्यों में बाधा उत्पन्न होने के मामले में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) वाड्रफनगर ने 2 नवंबर 2026 को अलग-अलग निलंबन आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है। वहीं, लंबे समय से प्रभावित राजस्व कार्यों को लेकर अब प्रशासन की सख्ती चर्चा में है।

पांच पटवारियों पर गिरी निलंबन की गाज
एसडीएम वाड्रफनगर द्वारा जारी आदेशों के अनुसार निलंबित किए गए पटवारियों के नाम इस प्रकार हैं—
- शैलेष मेहता – पटवारी, तहसील वाड्रफनगर
- धीरेन्द्र उरमलिया – पटवारी, तहसील रघुनाथनगर
- कपिलदेव भगत – पटवारी, तहसील रघुनाथनगर
- गौतम पटेल – पटवारी, तहसील वाड्रफनगर
- पन्नेलाल सोनवानी – पटवारी, तहसील रघुनाथनगर
नोटिस, अल्टीमेटम और फिर निलंबन… आखिर क्यों हुई कार्रवाई?
जारी आदेशों में उल्लेख किया गया है कि संबंधित पटवारियों को 15 अक्टूबर 2026 को कार्यालयीन पत्र के माध्यम से कार्यभार ग्रहण करने के लिए नोटिस जारी किया गया था।
इसके बावजूद जब पटवारी अपने कर्तव्य पर उपस्थित नहीं हुए, तो प्रशासन ने 31 अक्टूबर 2026 को दोबारा नोटिस जारी किया। इस बार उन्हें 1 नवंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया था।
साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय-सीमा में कार्यभार ग्रहण नहीं करने पर ब्रेक इन सर्विस (Break in Service) की कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन प्रशासन के इस अल्टीमेटम का भी असर नहीं हुआ। संबंधित पटवारियों ने न तो निर्धारित समय तक कार्यभार ग्रहण किया और न ही कार्यालय में कोई जवाब प्रस्तुत किया। इसके बाद एसडीएम ने निलंबन की कार्रवाई कर दी।
नामांतरण से गिरदावरी तक प्रभावित, आम जनता की बढ़ी परेशानी
निलंबन आदेशों में प्रशासन ने संबंधित पटवारियों की लगातार अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि इससे शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण राजस्व एवं न्यायालयीन कार्य प्रभावित हुए हैं।
प्रभावित कार्यों में शामिल हैं—
- न्यायालयीन एवं कार्यालयीन जांच प्रतिवेदन
- नामांतरण और बंटवारा
- सीमांकन संबंधी कार्य
- आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र
- गिरदावरी
- डीसीएस सहित अन्य महत्वपूर्ण राजस्व कार्य
प्रशासन के अनुसार इन कार्यों के प्रभावित होने से आम नागरिकों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आदेश में इसे शासकीय कार्यों के प्रति गंभीर लापरवाही और कर्तव्य निर्वहन में अनधिकृत अनुपस्थिति माना गया है।
सिविल सेवा आचरण नियमों के तहत कार्रवाई
एसडीएम द्वारा जारी निलंबन आदेशों में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(1), 3(2) एवं 3(3) का उल्लेख किया गया है।
इसके साथ ही आदेश में 13 अक्टूबर 2026 से हड़ताल पर जाने के बाद से कर्तव्य पर उपस्थित होने तक की अवधि को कार्य नहीं, वेतन नहीं (No Work, No Pay) के आधार पर अवरुद्ध किए जाने का उल्लेख है।
प्रशासन ने भविष्य में इस प्रकार की पुनरावृत्ति नहीं करने की चेतावनी भी दी है।
तत्काल प्रभाव से लागू हुआ निलंबन आदेश
2 नवंबर 2026 को जारी सभी पांच आदेशों में निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने का उल्लेख किया गया है।
आदेशों की प्रतिलिपि जिला कलेक्टर बलरामपुर-रामानुजगंज, संबंधित तहसीलदारों, उप कोषालय अधिकारी, राजस्व निरीक्षकों एवं संबंधित पटवारियों को आवश्यक सूचना और कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
प्रशासन की सख्ती के बाद अब आगे क्या?
वाड्रफनगर और रघुनाथनगर तहसील के पांच पटवारियों पर हुई इस कार्रवाई को प्रशासन की सख्ती के रूप में देखा जा रहा है। हड़ताल के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं करने के मामले में जारी निलंबन आदेशों ने राजस्व विभाग में हलचल तेज कर दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस कार्रवाई के बाद क्या नामांतरण, सीमांकन, गिरदावरी और प्रमाण पत्र जैसे जरूरी कार्यों में तेजी आएगी? क्या आम नागरिकों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी?
फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग में आगे की गतिविधियों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
Author: Man Tantra 24









