समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने से पहले ही संदिग्ध परिवहन पर प्रशासन का शिकंजा, संयुक्त टीम की कार्रवाई से मचा हड़कंप; अब जांच में सामने आएंगे कई अहम सवालों के जवाब
वाड्रफनगर/बलरामपुर/राम हरि गुप्ता। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन शुरू होने से पहले ही धान के संदिग्ध कारोबार को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। दूसरे राज्य से धान लाकर यहां खपाने की कोशिशों के बीच तीन दिनों तक चले अभियान में ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक महकमे को भी सक्रिय कर दिया। कार्रवाई के दौरान एक-दो नहीं, बल्कि छह पिकअप वाहन पकड़ में आए। इन वाहनों से कुल 303 बोरी धान बरामद किया गया है।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, जब्त किया गया धान उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ लाया जा रहा था। सबसे अहम बात यह रही कि जांच के दौरान वाहन चालकों और परिवहन से जुड़े लोगों के पास धान की खरीदी, वैध स्वामित्व और परिवहन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं मिले। इसके बाद प्रशासनिक टीम ने सभी छह वाहनों सहित धान को जब्त कर लिया।
तीन दिनों तक चला अभियान, अलग-अलग स्थानों पर पकड़े गए वाहन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 1 नवंबर से 3 नवंबर 2026 तक लगातार जांच एवं कार्रवाई अभियान चलाया गया। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर छह पिकअप वाहनों को पकड़ा गया। सभी वाहनों में धान की बोरियां लोड थीं। गिनती के बाद कुल 303 बोरी धान जब्त किया गया।
प्रशासन अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि धान कहां से खरीदा गया था, इसे छत्तीसगढ़ में कहां पहुंचाया जाना था और इसके परिवहन में किन लोगों की भूमिका थी।
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने संभाली कमान
यह पूरी कार्रवाई कलेक्टर चंदन त्रिपाठी के निर्देश पर वाड्रफनगर एसडीएम डॉ. टी.डी. मरकाम के नेतृत्व में की गई। अभियान में तहसीलदार उदयराज राज और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही।
राजस्व एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के समन्वय से अलग-अलग स्थानों पर जांच की गई। दस्तावेजों के अभाव और संदिग्ध अंतरराज्यीय परिवहन को देखते हुए वाहनों तथा धान की जब्ती की कार्रवाई की गई।

रघुनाथनगर थाना और बलंगी चौकी में रखे गए वाहन
कार्रवाई के बाद जब्त किए गए छह पिकअप वाहनों और उनमें लदे धान को रघुनाथनगर थाना एवं बलंगी पुलिस चौकी में रखा गया है। संबंधित मामलों में नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर धान के वास्तविक स्रोत, परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और इस कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
किसानों के हितों पर पड़ सकता है असर
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के दौरान दूसरे राज्यों से कम कीमत पर धान लाकर प्रदेश में खपाने की आशंका बनी रहती है। यदि इस तरह का अवैध कारोबार होता है तो इससे प्रदेश के वास्तविक किसानों के हित प्रभावित होने के साथ ही शासन की धान खरीदी व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका भी रहती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों और प्रमुख मार्गों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल… आखिर किसके लिए लाया जा रहा था धान?
छह पिकअप वाहनों से 303 बोरी धान की जब्ती के बाद अब जांच के नतीजों पर सबकी नजरें टिकी हैं। आखिर इस धान का वास्तविक खरीदार कौन था? इसे प्रदेश में कहां खपाने की तैयारी थी? क्या इसके पीछे केवल कुछ वाहन चालक थे या कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है?
फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे। तीन दिनों तक चले अभियान में हुई इस कार्रवाई ने धान के संदिग्ध परिवहन को लेकर प्रशासन की निगरानी और सख्ती का संकेत जरूर दे दिया है।
Author: Man Tantra 24









