मऊगंज/रीवा/प्रकाश द्विवेदी। मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के लौर और नईगढ़ी थानों में दर्ज 1000 से अधिक मामलों में केवल छह लोगों को सरकारी गवाह बनाया गया। इसमें से एक व्यक्ति पांच सौ से अधिक मामलों में गवाही देता मिला।
◆ कैसे खुला मामला
CCTNS पोर्टल के रिकॉर्ड की जांच में यह खुलासा हुआ कि चोरी, मारपीट, आबकारी उल्लंघन, जुआ और यहां तक कि NDPS जैसे गंभीर मामलों में भी बार-बार वही चेहरे गवाह बनाए गए।
◆ आम नागरिक नहीं थे, थाने से जुड़े लोग
जांच में सामने आया कि ये गवाह आम लोग नहीं थे, बल्कि थाने का ड्राइवर,रसोइया और पुलिस से जुड़े सहयोगी थाना स्टाफ या उससे नज़दीकी लोग ही बार-बार गवाही दे रहे थे। कुछ गवाहों ने स्वीकार किया कि उन्हें यह तक नहीं पता था कि वे किस केस में गवाही दे रहे हैं। वे केवल पुलिस कहने पर हस्ताक्षर कर देते थे।
◆ RTI में इनकार, कैमरे में सच
RTI में पुलिस ने दावा किया कि “अमित कुशवाहा थाना वाहन चालक नहीं है।” लेकिन मीडिया जांच में वही व्यक्तिनईगढ़ी थाने की सरकारी गाड़ी चलाते कैमरे में रिकॉर्ड हुआ। इस विरोधाभास ने पुलिस विभाग की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है।
◆ टीआई के ऊपर आरोप, कार्रवाई शुरू
इस पूरे मामले के केंद्र में नईगढ़ी थाना प्रभारी रहे जगदीश सिंह ठाकुर का नाम सामने आया है। सबसे अधिक संदिग्ध गवाह उनके कार्यकाल में बनाए गए। मामला उजागर होने के बाद पुलिस विभाग ने उन्हें थाने से हटाकर लाइन अटैच कर दिया है।
◆ एसपी का बयान
मऊगंज एसपी दिलीप सोनी ने कहा—“पूरा प्रकरण गंभीर है। जांच कराई जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
◆ सियासत भी गरम
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व विधायक गिरीश गौतम ने इसे जनता के भरोसे का बड़ा धोखा बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
◆ गवाहों की स्वीकारोक्ति
कथित सरकारी गवाहों ने फर्जीवाड़े की पुष्टि की —राहुल विश्वकर्मा: “मुझे कई मामलों में जबरन गवाह बना दिया गया।” दिनेश कुशवाहा: “पुलिस साइन करा लेती थी, केस की जानकारी नहीं दी जाती थी।”
◆ मामला क्यों खतरनाक
फर्जी या पक्षपातपूर्ण गवाहों का इस्तेमाल केस की जांच को कमजोर करता है अदालतों को गुमराह करता है पीड़ित और आरोपी—दोनों के साथ अन्याय की आशंका पैदा करता है न्याय व्यवस्था पर भरोसा तोड़ता है
मऊगंज में सामने आया ‘सुपर गवाह सिस्टम’ सिर्फ कागजी गड़बड़ी नहीं, कानून और लोकतंत्र पर सीधा हमला है। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।
Author: mantantra24





