चिरमिरी के डॉ. भीमराव अंबेडकर सर्व समाज मांगलिक भवन निर्माण से जुड़ा मामला, हाईकोर्ट ने कहा– विवादित तथ्यों का फैसला रिट याचिका में नहीं हो सकता।
बिलासपुर/चिरमिरी/सुनील शर्मा। चिरमिरी नगर निगम द्वारा प्रस्तावित डॉ. भीमराव अंबेडकर सर्व समाज मांगलिक भवन के निर्माण कार्य से जुड़े भुगतान विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ठेकेदार विनय जायसवाल की रिट याचिका खारिज कर दी है। हालांकि न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कानून के तहत उपलब्ध अन्य वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता भी दी है।
याचिकाकर्ता का दावा था कि नगर निगम ने लगभग 3.08 करोड़ रुपये के निर्माण कार्य का ठेका दिया था। उन्होंने लगभग 24 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया था, जिसकी माप एवं सत्यापन भी अधिकारियों द्वारा किया गया। इसके बाद करीब 63.39 लाख रुपये के पहले बिल तथा 21.20 लाख रुपये की अतिरिक्त देय राशि का भुगतान नहीं किया गया। ठेकेदार ने भुगतान के साथ 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की भी मांग की थी।
मामले में नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि प्रकरण में कई विवादित तथ्य हैं, जिनका निर्णय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर रिट याचिका में नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जहां तथ्यों को लेकर विवाद हो, वहां हाईकोर्ट सामान्यतः रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग नहीं करता। ऐसे मामलों का समाधान सिविल कोर्ट, मध्यस्थता (Arbitration) या अन्य सक्षम कानूनी मंच पर किया जाना उचित होता है।
इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। हालांकि आदेश में स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता कानून के अनुसार उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय अपनाने के लिए स्वतंत्र रहेगा।
Author: Man Tantra 24









