VSK ऐप से वेतन भुगतान के आदेश पर शिक्षकों का बवाल, फेडरेशन ने 7 दिन में आदेश वापस लेने की चेतावनी
रायपुर/सुनील शर्मा। छत्तीसगढ़ में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति को लेकर जारी नए आदेश पर विवाद गहराता जा रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार अब शासकीय शिक्षकों एवं कर्मचारियों का मासिक वेतन VSK ऐप में दर्ज ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर आहरित किया जाएगा। इस फैसले का छत्तीसगढ़ सहायक एवं समग्र शिक्षक फेडरेशन ने कड़ा विरोध करते हुए इसे शिक्षकों के हितों के खिलाफ और पूरी तरह अव्यावहारिक बताया है।
फेडरेशन ने आदेश के बिंदु क्रमांक-3 को तत्काल निरस्त करने की मांग करते हुए शासन को 7 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। संगठन का कहना है कि यदि तकनीकी खामियों की अनदेखी कर किसी शिक्षक का वेतन रोका या काटा गया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
‘ऐप फेल, फिर भी वेतन कटेगा?’
फेडरेशन का आरोप है कि पिछले एक वर्ष से VSK ऐप लगातार तकनीकी समस्याओं से जूझ रहा है। प्रदेश के हजारों शिक्षक रोजाना सर्वर फेल होने, लॉगिन नहीं होने, GPS लोकेशन गलत दिखने और नेटवर्क की समस्या के कारण समय पर उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं।
संगठन का कहना है कि बस्तर, सरगुजा, जशपुर समेत कई दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी इंटरनेट कनेक्टिविटी बड़ी चुनौती है। ऐसे में शिक्षक स्कूल में मौजूद होने के बावजूद ऐप पर अनुपस्थित दिख सकते हैं, जिससे उनके वेतन पर संकट खड़ा हो जाएगा।
‘मैनुअल उपस्थिति रजिस्टर को क्यों किया नजरअंदाज?’
फेडरेशन ने सवाल उठाया है कि सभी सरकारी स्कूलों में आज भी भौतिक उपस्थिति पंजी संधारित की जाती है, जिस पर संकुल प्राचार्य और संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर होते हैं। इसके बावजूद केवल ऐप आधारित उपस्थिति को वेतन का आधार बनाना न्यायसंगत नहीं है।
फेडरेशन की तीन प्रमुख मांगें
- आदेश के बिंदु क्रमांक-3 को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए।
- VSK ऐप की तकनीकी खामियां दूर होने और सभी क्षेत्रों में बेहतर नेटवर्क उपलब्ध होने तक भौतिक उपस्थिति पंजी को ही अंतिम प्रमाण माना जाए।
- ऐप की तकनीकी समस्याओं की जांच के लिए शिक्षक प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
फेडरेशन ने स्पष्ट कहा है कि यदि बिना जांच और सत्यापन के किसी भी शिक्षक का वेतन रोका या काटा गया, तो प्रदेशभर में धरना, प्रदर्शन और सामूहिक अवकाश सहित व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
फेडरेशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर, अश्वनी कुर्रे, बसंत कौशिक और कौशल अवस्थी ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षा का डिजिटलीकरण स्वागतयोग्य है, लेकिन तकनीकी खामियों का बोझ शिक्षकों पर डालना उचित नहीं है। उनका कहना है कि “शिक्षा का डिजिटलीकरण होना चाहिए, लेकिन शिक्षक के पेट पर लात मारकर नहीं।”
Author: Man Tantra 24









