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सेवा संकल्प के मंच से बड़ा संकल्प: शैलेश शिवहरे और अनिल शर्मा ने किया अंगदान तो वरिष्ठ शिक्षक चिकनजूरी ने आँख दान का ऐलान

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‘जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी सेवा’: शैलेश शिवहरे और अनिल शर्मा ने मंच से किया अंगदान तो वरिष्ठ शिक्षक चिकनजूरी जी ने किया आँख दान का महासंकल्प

बैकुंठपुर/सुनील शर्मा। जब संवेदनाएं केवल शब्दों तक सीमित न रहकर कर्म में बदलती हैं, तब समाज में एक नए युग की शुरुआत होती है। सेवा संकल्प के मंच से बैकुंठपुर ने आज इंसानियत की वह मिसाल देखी, जो आने वाली पीढ़ियों को नई दिशा देगी। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ भाजपा नेता शैलेश शिवहरे और जिला योग समिति के अध्यक्ष अनिल शर्मा ने मृत्यु उपरांत अंगदान एवं वरिष्ट शिक्षक चिकनजूरी जी आंख दान का ऐलान कर मानवता का सर्वोच्च उदाहरण पेश किया है।

वृद्धजनों के सम्मान समारोह में गूंजा महासंकल्प मौका था ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित वृद्धजनों के सम्मान और निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का। कार्यक्रम में एक तरफ जहां बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जा रहा था और उनके स्वास्थ्य की जांच हो रही थी, वहीं दूसरी तरफ मंच से हुए इस ऐतिहासिक ऐलान ने पूरे सभागार को भावुक और ऊर्जा से भर दिया। शैलेश शिवहरे और अनिल शर्मा ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि उनकी मृत्यु के बाद उनके अंग जरूरतमंदों को नया जीवन देने के काम आएंगे।

तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा सभागार जैसे ही दोनों प्रबुद्ध नागरिकों ने अपने देह के अंगों को समाज के नाम समर्पित करने का संकल्प पत्र भरा, पूरा परिसर करतल ध्वनि से गूंज उठा। उपस्थित जनसमूह ने खड़े होकर इस अभूतपूर्व निर्णय का स्वागत किया। समाज में आज भी अंगदान को लेकर कई भ्रांतियां और झिझक मौजूद हैं, ऐसे दौर में दो प्रमुख जननेताओं द्वारा उठाया गया यह कदम समाज की सोच बदलने में मील का पत्थर साबित होगा।

“सेवा केवल जीवित रहते हुए हाथ थामने का नाम नहीं है; यदि हमारे जाने के बाद भी हमारी आंखों से कोई दुनिया देख सके और हमारी सांसों से किसी की जिंदगी बच सके, तो यही मानव जीवन की सार्थकता है।”

एक मंच, दोहरा संदेश: सेवा और समर्पण बुजुर्गों की सेवा के उद्देश्य से शुरू हुआ यह आयोजन अंगदान के इस महासंकल्प के साथ जन-चेतना का बड़ा आंदोलन बन गया। दोनों नेताओं की इस पहल ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सेवा का दायरा जीवन के अंतिम पड़ाव पर खत्म नहीं होता, बल्कि जीवन के पार जाकर किसी के जीवन में रोशनी भर देना ही वास्तविक धर्म है। बैकुंठपुर से उठी यह प्रेरणादायी लहर अब पूरे जिले में अंगदान के प्रति जागरूकता की नई अलख जगा रही है।

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Author: Man Tantra 24

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