कलेक्टर बनीं शिक्षिका: बच्चों को खुद पढ़ाया गणित, विज्ञान और संविधान का पाठ
बैकुंठपुर/बचरा पोड़ी | मन तंत्र l सुनील शर्मा
जिला कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने गुरुवार को बचरा पोड़ी क्षेत्र के विद्यालयों का औचक निरीक्षण कर शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत परखी। निरीक्षण के दौरान उनका एक अलग ही रूप देखने को मिला, जब वे अधिकारी नहीं बल्कि शिक्षिका बनकर सीधे कक्षा में पहुंचीं और बच्चों को स्वयं पढ़ाना शुरू कर दिया।
कलेक्टर ने स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (SAGES), बचरा पोड़ी का निरीक्षण करते हुए स्कूल की शैक्षणिक गतिविधियों, अनुशासन, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने छात्र-छात्राओं से संवाद स्थापित किया और उनकी सीखने की क्षमता को परखते हुए स्वयं कक्षा संचालित की।
गणित और विज्ञान को बनाया आसान
कलेक्टर ने विद्यार्थियों को गणित (Mathematics) एवं विज्ञान (Science) के महत्वपूर्ण विषयों को बेहद सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ उनके सवालों के जवाब दिए और पढ़ाई में सक्रिय भागीदारी दिखाई।
संविधान और नागरिक कर्तव्यों की भी दी सीख
केवल विज्ञान और गणित ही नहीं, बल्कि उन्होंने विद्यार्थियों को भारतीय संविधान, लोकतांत्रिक व्यवस्था, नागरिक अधिकार एवं कर्तव्यों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा के साथ संवैधानिक मूल्यों की समझ भी प्रत्येक विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण के लिए आवश्यक है।
«“शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और बच्चों में विषयों की व्यावहारिक समझ विकसित करना हमारी प्राथमिकता है। जब छात्र विषयों को समझने के साथ-साथ संविधान और नागरिक कर्तव्यों से जुड़ते हैं, तभी एक सशक्त समाज का निर्माण होता है। हमारे शिक्षकों को समझना होगा कि छात्र को रट्टू तोता नहीं कैरियर ओरिएंटेड शिक्षा देनी होगी”
— श्रीमती रोक्तिमा यादव, कलेक्टर, जिला कोरिया»
शिक्षकों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश
निरीक्षण के समापन पर कलेक्टर ने विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों को नियमित पठन-पाठन, विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेलकूद तथा प्रायोगिक गतिविधियों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का माध्यम बननी चाहिए।
मन तंत्र विश्लेषण
जिला कलेक्टर का यह पहलू प्रशासनिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर शिक्षा के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है। अधिकारियों का इस तरह सीधे कक्षा में पहुंचकर बच्चों से जुड़ना न केवल विद्यार्थियों को प्रेरित करता है, बल्कि शिक्षकों के लिए भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षण का सकारात्मक संदेश देता है।
Author: Man Tantra 24









