सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत की जांच पर उठे निष्पक्षता के सवाल, नोटिस की भाषा पर भी उठे प्रश्न; पत्रकार संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
बलरामपुर-रामानुजगंज | विशेष रिपोर्ट
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में पत्रकारों से जुड़े एक मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री की ऑनलाइन शिकायत व्यवस्था (सीएम हेल्पलाइन) के माध्यम से बसंतपुर थाना प्रभारी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले पत्रकार रामहरी गुप्ता को अब उसी थाना परिसर में बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस जारी किए जाने से विवाद गहरा गया है।
मामले को लेकर पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब शिकायत किसी थाना प्रभारी या थाने की कार्यप्रणाली के विरुद्ध हो, तब शिकायतकर्ता को उसी थाने में बुलाकर बयान लेना निष्पक्ष जांच की भावना के विपरीत प्रतीत होता है और इससे पूरी जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।
शिकायतकर्ता का पक्ष: “निष्पक्ष माहौल में देना चाहता हूं बयान”
पत्रकार रामहरी गुप्ता का कहना है कि उन्होंने बसंतपुर थाना प्रभारी की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद बसंतपुर थाने में पदस्थ एक एएसआई लगातार उन्हें फोन कर थाने बुला रहे थे।
रामहरी गुप्ता के अनुसार उन्होंने पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया कि वे पत्रकार होने के साथ-साथ किसान भी हैं और इन दिनों धान रोपाई के कार्य में व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि कुछ दिनों बाद वे एसडीओपी कार्यालय वाड्रफनगर में उपस्थित होकर अपना बयान देने के लिए तैयार हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष वातावरण में संपन्न हो सके। उनका कहना है कि जिस थाना प्रभारी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई है, उसी थाना परिसर में बयान देना स्वाभाविक रूप से निष्पक्ष जांच की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
फिर भी जारी हुआ नोटिस
इसी बीच 2 अगस्त 2026 को बसंतपुर थाना प्रभारी कार्यालय से एक लिखित नोटिस जारी किया गया। नोटिस में उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता को पहले मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क कर थाना बुलाया गया था, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने पर उन्हें 3 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे थाना बसंतपुर में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत का समय-सीमा के भीतर निराकरण किया जा सके।
‘हिदायत’ शब्द के प्रयोग पर भी उठे सवाल

बसंतपुर थाना प्रभारी कार्यालय द्वारा जारी नोटिस की भाषा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि शिकायतकर्ता को मोबाइल के माध्यम से संपर्क कर थाना उपस्थित होने के लिए “हिदायत” दी गई थी।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि जब शिकायत स्वयं थाना प्रभारी के विरुद्ध दर्ज हो, तब नोटिस में “हिदायत” जैसे अपेक्षाकृत कठोर शब्द का प्रयोग अनावश्यक प्रतीत होता है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में “सूचित किया गया”, “अनुरोध किया गया” अथवा “उपस्थित होने के लिए कहा गया” जैसी तटस्थ प्रशासनिक भाषा अधिक उपयुक्त मानी जाती।
संगठनों का यह भी कहना है कि नोटिस की भाषा और शिकायतकर्ता को उसी थाने में बयान देने के लिए बुलाने की प्रक्रिया, दोनों मिलकर जांच की निष्पक्षता पर संदेह उत्पन्न कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
निष्पक्ष जांच पर उठे गंभीर सवाल
पूरे घटनाक्रम को लेकर जिले सहित प्रदेश के पत्रकारों में नाराजगी देखी जा रही है। पत्रकारों का कहना है कि यदि शिकायत का विषय स्वयं थाना प्रभारी हैं, तो शिकायतकर्ता को उसी थाने में बुलाकर बयान लेना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
उनका तर्क है कि ऐसे मामलों में शिकायतकर्ता का बयान किसी वरिष्ठ अधिकारी, जैसे एसडीओपी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक या पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिया जाना अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया होती। इससे शिकायतकर्ता का विश्वास भी बना रहता और जांच पर किसी प्रकार का संदेह भी नहीं होता।
पत्रकार संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी
मामले पर विभिन्न पत्रकार संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि पत्रकारों की शिकायतों के साथ इसी प्रकार का व्यवहार जारी रहा, तो प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
संगठनों का कहना है कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। यदि शिकायत दर्ज कराने वाले पत्रकार को ही ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़े जिससे जांच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगे, तो यह पूरे लोकतांत्रिक तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
पुलिस प्रशासन से उठी प्रमुख मांगें
पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने पुलिस अधीक्षक बलरामपुर से मांग की है कि—
- मामले की जांच किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए।
- शिकायतकर्ता का बयान थाना बसंतपुर के बजाय एसडीओपी कार्यालय वाड्रफनगर अथवा किसी अन्य निष्पक्ष स्थान पर दर्ज कराया जाए।
- पूरी जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए ताकि किसी भी पक्ष को पक्षपात या दबाव का आरोप लगाने का अवसर न मिले।
अब पुलिस प्रशासन के फैसले पर टिकी निगाहें
यह मामला अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निष्पक्ष जांच, प्रशासनिक पारदर्शिता, शिकायतकर्ता के अधिकारों और पत्रकारों के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। अब सबकी निगाहें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर हैं कि वह जांच प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का किस प्रकार जवाब देता है और क्या इस मामले में शिकायतकर्ता को निष्पक्ष वातावरण में अपना पक्ष रखने का अवसर उपलब्ध कराया जाता है।
Author: Man Tantra 24









