सिस्टम शर्मसार: पोस्टमार्टम के बाद नहीं मिला शव वाहन; ऑटो में पैर लटकाकर बेटे की लाश घर ले जाने को मजबूर हुए बेबस परिजन
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) से अमित जायसवाल की ग्राउंड रिपोर्ट
जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग की एक ऐसी अमानवीय और संवेदनहीन तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी दावों की धज्जियां उड़ाकर रख दी हैं। अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद एक 22 वर्षीय मृत युवक के परिजनों को शव को ससम्मान घर ले जाने के लिए सरकार की ‘निशुल्क 1099 शव वाहन’ सेवा तक नसीब नहीं हुई।

मजबूरी और बेबसी के आंसू रोते हुए परिजन, अपने कलेजे के टुकड़े की लाश को एक ऑटो में लादकर, पैर बाहर लटकाए हुए ले जाने को विवश हुए। इस हृदयविदारक घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।
🚨 संवेदनहीनता की हद: साहब ने फोन काटा, दुख की घड़ी में परिजनों को दुत्कारा
मृतक के परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्होंने शव वाहन (1099) के लिए गुहार लगाई। जब वाहन नहीं मिला, तो हताश होकर उन्होंने इस व्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारी को बार-बार फोन किया। लेकिन संवेदनशीलता दिखाने के बजाय अधिकारी ने फोन कॉल तक रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा।
सिस्टम से हारी मानवता: जब दुख की इस घड़ी में सरकारी तंत्र से कोई मदद नहीं मिली, तो मजबूर परिजनों ने एक निजी ऑटो (क्र. CG 11…) किराए पर लिया और शव को जैसे-तैसे उसमें रखकर अंतिम संस्कार के लिए रवाना हुए।

🛑 अस्पताल छोड़, बस स्टैंड पर ऐश कर रहा था सरकारी ‘शव वाहन’
नियमों के मुताबिक, आपातकालीन स्थिति और त्वरित सेवा के लिए 1099 शव वाहन को हमेशा जिला चिकित्सालय परिसर के भीतर ही तैनात रहना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में जो सच सामने आया वो चौंकाने वाला है:
- नियमों की धज्जियां: जांच में पता चला कि शव वाहन अस्पताल परिसर में नहीं, बल्कि स्थानीय बस स्टैंड पर खड़ा था।
- सजग नागरिकों ने खोली पोल: बस स्टैंड पर खड़े वाहन की तस्वीर स्थानीय नागरिकों ने खींचकर साक्ष्य के रूप में प्रशासन को भेजी, जिसके बाद अधिकारियों की बोलती बंद हो गई।
📋 CMHO का कड़ा रुख: ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी, कलेक्टर तक पहुंची फाइल
इस अत्यंत गंभीर और अनुशासनहीन मामले को संज्ञान में लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ने कड़ा रुख अपनाया है। आधिकारिक आदेश क्रमांक/स्था./2026/281 (दिनांक 14/05/2026) के तहत जिला प्रभारी (1099) को एक तीखा ‘कारण बताओ नोटिस’ थमाया गया है।
नोटिस में CMHO का सीधा सवाल:
“न्यूज़ के माध्यम से संज्ञान में आया है कि 22 वर्षीय युवक का जिला चिकित्सालय में पोस्टमार्टम उपरांत पार्थिव मृत शरीर को आपके 1099 शव वाहन द्वारा घर नहीं छोड़ा गया, न ही फोन कॉल रिसीव किया गया जो अत्यंत लापरवाही है। आप अपना स्पष्टीकरण तत्काल अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष उपस्थित होकर देवें कि क्यों न आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाये।”

CMHO ने इस पूरी घटना को घोर अनुशासनहीनता और संवेदनहीनता माना है। चेतावनी दी गई है कि यदि जिला प्रभारी द्वारा नियत समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, तो सीधे बर्खास्तगी या कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पत्र की प्रतिलिपि जिले के कलेक्टर को भी भेज दी गई है।
🎯 बड़ा सवाल: दावों और हकीकत में इतना फासला क्यों?
सरकार जनता के टैक्स के करोड़ों रुपये खर्च करके मुफ्त हेल्पलाइन और शव वाहन सेवाएं (1099) शुरू करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर ये योजनाएं लापरवाह प्रभारियों की मनमानी की भेंट चढ़ जाती हैं।
- सवाल उठता है: यदि जिला अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में एक पीड़ित परिवार को लाश ले जाने के लिए भटकना पड़े और जिम्मेदार अधिकारी फोन तक न उठाएं, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहाँ जाए?
अब पूरे जिले की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और कलेक्टर इस दोषी अधिकारी पर क्या ऐसी कार्रवाई करते हैं, जो आगे के लिए एक नजीर बने
Author: Man Tantra 24










