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वृद्धजनों के सम्मान के मंच पर प्रशासनिक ‘अनदेखी’!नेताओं को बुके, लेकिन कलेक्टर-SP का सम्मान नहीं? पत्रकारों के लिए भी नहीं थी बैठने की व्यवस्था

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वृद्धजनों के सम्मान के मंच पर प्रशासनिक ‘अनदेखी’!

नेताओं को बुके, लेकिन कलेक्टर-SP का सम्मान नहीं? पत्रकारों के लिए भी नहीं थी बैठने की व्यवस्था

बैकुण्ठपुर/सुनील शर्मा। सेवा संकल्प अभियान के तहत 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर बैकुण्ठपुर के शासकीय आदर्श रामानुज उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के मिनी स्टेडियम में वृद्धजनों के सम्मान एवं स्वास्थ्य परीक्षण का जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, स्वास्थ्य और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

लेकिन जिस कार्यक्रम में सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश दिया जाना था, उसी कार्यक्रम में व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए।

कार्यक्रम में जिला कलेक्टर रोक्तिमा यादव, पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर सहित जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मंच पर मौजूद रहे। तस्वीर में मंच पर जनप्रतिनिधियों के सम्मान के लिए बुके दिए जाने की व्यवस्था साफ दिखाई दे रही है।

लेकिन सवाल यह है कि जिले के दो प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों—कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक—के सम्मान की बारी क्यों नहीं आई?

क्या यह महज कार्यक्रम संचालन की सामान्य चूक थी या फिर सम्मान समारोह की तैयारियों में ही कहीं तालमेल की कमी रह गई?

नेताओं के सम्मान की व्यवस्था, पत्रकारों के लिए कुर्सी तक नहीं!

मामला सिर्फ अधिकारियों के सम्मान तक सीमित नहीं है। कार्यक्रम की कवरेज के लिए पत्रकारों को आमंत्रित किया गया, लेकिन पत्रकारों के बैठने के लिए अलग से कोई समुचित व्यवस्था नजर नहीं आई।

ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मंच और बैठने की व्यवस्था की गई, तो कार्यक्रम को जनता तक पहुंचाने वाले पत्रकारों के लिए व्यवस्था सुनिश्चित करने में जिम्मेदार विभाग से चूक कैसे हुई?

जिस अभियान का संदेश ‘सम्मान’ है, वहां व्यवस्था पर सवाल

सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान के साथ स्वास्थ्य जांच, वित्तीय संरक्षण, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी देने की भी योजना थी।

लेकिन कार्यक्रम की तस्वीर सामने आने के बाद अब चर्चा इस बात की है कि—

क्या यह महज प्रशासनिक चूक है?
क्या आयोजन से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने व्यवस्थाओं की समीक्षा नहीं की?
या फिर सम्मान समारोह में प्रोटोकॉल और प्राथमिकताओं को लेकर ही कोई गड़बड़ी हुई?

फिलहाल तस्वीर कई सवाल छोड़ रही है। अब देखना होगा कि समाज कल्याण विभाग और कार्यक्रम के जिम्मेदार अधिकारी इस कथित अव्यवस्था को महज संयोग मानते हैं या इसकी जिम्मेदारी तय करने की जरूरत महसूस करते हैं।

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Author: Man Tantra 24

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