बड़ा खुलासा: छत्तीसगढ़ में ‘फर्जी’ शिक्षक का लिखित कबूलनामा, फिर भी 40 दिनों से मेहरबान है बलरामपुर DEO!
बलरामपुर | छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में नियमों को ताक पर रखकर ‘रेवड़ियां’ बांटने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पेंडारी (वाड्रफनगर) में पदस्थ एक अतिथि शिक्षक ने खुद स्वीकार किया है कि वह छत्तीसगढ़ का निवासी नहीं है, फिर भी सरकारी खजाने से उसे हर महीने ₹18,000 का भुगतान किया जा रहा है।
खुद के हस्ताक्षर से कबूला जुर्म: “मैं MP का निवासी हूं”
आरोपी शिक्षक राजपति यादव ने 23 अगस्त 2025 को बाकायदा लिखित में यह स्वीकार किया:
“मैं कबूल करता हूं कि मेरे पास छत्तीसगढ़ का स्थाई निवास प्रमाण पत्र नहीं है। मेरे पास मध्य प्रदेश का स्थाई निवास प्रमाण पत्र है।”

इस लिखित कबूलनामे के बाद भी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
शासन के आदेश की उड़ी धज्जियां
छत्तीसगढ़ शासन के आदेश क्रमांक F 12-7/2014/20-2 (दिनांक 14.06.2019) के नियम बेहद स्पष्ट हैं:
- कंडिका 4.2: अतिथि शिक्षक के लिए प्राथमिकता स्थानीय राजस्व जिले के आवेदकों को दी जाएगी। यानी छत्तीसगढ़ का निवासी होना अनिवार्य है।
- कंडिका 7.3: किसी भी अनियमितता पर समिति तत्काल सेवा समाप्त कर सकती है।
-

Oplus_16908288
इन स्पष्ट नियमों के बावजूद, मध्य प्रदेश के निवासी को छत्तीसगढ़ के युवाओं का हक मारकर नौकरी पर बनाए रखना सीधे तौर पर शासन को चुनौती देना है।
DEO कार्यालय की ‘रहस्यमयी’ चुप्पी: 40 दिन, शून्य कार्रवाई
शिकायतकर्ता मयंक सिंह ने 27 मार्च 2026 को ही सारे दस्तावेजी सबूतों के साथ DEO बलरामपुर को शिकायत सौंपी थी।
- 40 दिन बीत गए: न जांच पूरी हुई, न ही फर्जी शिक्षक को हटाया गया।
- वित्तीय गबन: हर महीने ₹18,000 का अवैध भुगतान जारी है, जो सरकारी धन का सीधा दुरुपयोग है।
- मिलीभगत का शक: सबूत सामने होने के बाद भी FIR दर्ज न होना विभाग की संलिप्तता की ओर इशारा करता है।
कानूनी शिकंजा: जेल जा सकते हैं जिम्मेदार
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल विभागीय जांच तक सीमित नहीं है। इसमें कई संगीन धाराएं बनती हैं:
|
धारा (IPC) |
विवरण |
|---|---|
|
420 |
धोखाधड़ी |
|
467, 468, 471 |
फर्जी दस्तावेज तैयार करना और उपयोग करना |
|
120B |
आपराधिक षड्यंत्र (DEO और संबंधित अधिकारियों पर लागू) |
स्थानीय युवाओं का आक्रोश: “हमारा हक क्यों मारा?”
वाड्रफनगर के शिक्षित बेरोजगारों में भारी नाराजगी है। युवाओं का कहना है कि जब स्थानीय लोग पात्र हैं, तो बाहरी और फर्जी दस्तावेज वालों को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है?
अल्टीमेटम: शिकायतकर्ता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 3 दिनों के भीतर आरोपी को बर्खास्त कर FIR दर्ज नहीं की गई, तो मामला कलेक्टर, लोकायुक्त और हाईकोर्ट बिलासपुर तक ले जाया जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी: क्या बलरामपुर प्रशासन इस खुले फर्जीवाड़े पर संज्ञान लेगा, या ‘जांच’ के नाम पर फाइल को दबा दिया जाएगा? छत्तीसगढ़ के युवाओं की नजरें अब कलेक्टर की कार्रवाई पर टिकी हैं।
Author: Man Tantra 24










