वाड्रफनगर/बलरामपुर: जिले के वाड्रफनगर अनुभाग में प्रशासनिक सुस्ती और कार्यप्रणाली पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मामला फर्जी पट्टे के निरस्तीकरण का है, जहाँ एक पत्रकार और जागरूक नागरिक राम हरी गुप्ता को सिस्टम से लड़ते हुए 3 साल बीत गए। हद तो तब हो गई जब कागजों पर पट्टा निरस्त होने के एक महीने आठ दिन बाद भी इसकी फाइल एसडीएम कार्यालय से कलेक्टर दफ्तर तक का सफर तय नहीं कर पाई है।
3 साल की जंग और ‘औपचारिकता’ का खेल
विदित हो कि आवेदक राम हरी गुप्ता ने लगभग 3 वर्ष पूर्व कलेक्टर जनदर्शन में फर्जी पट्टे की शिकायत की थी। लंबी जांच, तहसीलदार की टीम की रिपोर्ट और ग्राम पंचायत कुंदी की ‘वन अधिकार समिति’ द्वारा पट्टे को फर्जी करार दिए जाने के बावजूद, एसडीएम कार्यालय कुंडली मारकर बैठा रहा। अंततः 19 मार्च 2026 को जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर में शिकायत के बाद प्रशासन जागा और 20 मार्च को आनन-फानन में पट्टा निरस्त किया गया।
फाइल है या कोई भारी बोझ?
विडंबना देखिए, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (पत्रकार) को एक फर्जी पट्टा निरस्त कराने में 3 साल लग गए, लेकिन असली तमाशा तो अब शुरू हुआ है। 20 मार्च को निरस्त किए गए पट्टे की फाइल आज (28 अप्रैल 2026) तक कलेक्टर बलरामपुर के दफ्तर नहीं पहुंची है। जब आवेदक ने कलेक्ट्रेट और एसी कार्यालय में पड़ताल की, तो पता चला कि वाड्रफनगर से ऐसा कोई दस्तावेज आया ही नहीं है।
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बड़ा सवाल: क्या ट्रक या टेलर का इंतज़ार है?
अब जनता यह पूछ रही है कि क्या वाड्रफनगर से बलरामपुर तक एक फाइल भेजने के लिए किसी विशेष ट्रक या टेलर की व्यवस्था करनी पड़ेगी? या फिर यह माना जाए कि यह निरस्तीकरण सिर्फ कागजी खानापूर्ति और उच्च अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया गया था?
प्रशासनिक संरक्षण की बू
एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाना यह दर्शाता है कि या तो वाड्रफनगर एसडीएम कार्यालय बेहद लापरवाह है, या फिर जानबूझकर फाइल को दबाया जा रहा है ताकि दोषियों को बचाया जा सके। जब एक पत्रकार के साथ न्याय होने में इतना वक्त लग रहा है, तो आम जनता की क्या बिसात?
अब देखना यह है कि इस खबर के प्रकाशन के बाद ‘शाही नींद’ में सोया विभाग जागता है या फाइल अभी और महीनों तक धूल फांकती रहेगी
Author: Man Tantra 24










