पंचायत सचिव पर प्रशासन का बड़ा एक्शन! वित्तीय गड़बड़ी, मारपीट और मनमानी के आरोपों के बीच हुआ निलंबन
उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद कलेक्टर की कार्रवाई, लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता और मनरेगा में गड़बड़ी के आरोपों से घिरे थे सचिव
GPM/अमित जायसवाल। जिले के पंचायत महकमे में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। लंबे समय से वित्तीय अनियमितताओं, शासकीय आदेशों की अवहेलना, मनरेगा में हेराफेरी और मारपीट जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे सचिव पर आखिरकार प्रशासन का चाबुक चल गया।
जानकारी के अनुसार, जिला पंचायत द्वारा ग्राम पंचायत तरईगांव के सचिव किशन राठौर को निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभिन्न जांचों में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
क्या हैं आरोप?
जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों के अनुसार, सचिव पर कई गंभीर आरोप लगे हैं—
- 17.26 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता: ग्राम पंचायत पीपरखूंटी में 15वें वित्त आयोग की राशि का कथित रूप से डिजिटल सिग्नेचर (DSC) के दुरुपयोग के जरिए अनियमित आहरण।
- शासकीय आदेशों की अवहेलना: अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अन्य पंचायतों के कार्यों में हस्तक्षेप और अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी।
- मारपीट और धमकाने के आरोप: जमीन विवाद से जुड़े मामलों में मारपीट और धमकी देने की शिकायतें, जिनकी पुलिस जांच जारी है।
- मनरेगा में गड़बड़ी: सामुदायिक जल संचयन कार्यों में मशीनों के अवैध उपयोग का आरोप भी जांच में सही पाया गया।
मामला पहुंचा उच्च न्यायालय
सचिव के खिलाफ शिकायतों का मामला छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। न्यायालय ने मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद उनके खिलाफ शिकायतों का सिलसिला जारी रहा। इससे पहले भी वे आदर्श आचरण संहिता उल्लंघन के मामले में निलंबित रह चुके हैं।
निलंबन के दौरान मरवाही होगा मुख्यालय
जिला पंचायत द्वारा जारी आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान सचिव का मुख्यालय जनपद पंचायत मरवाही निर्धारित किया गया है। उन्हें बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही समस्त शासकीय अभिलेख और सामग्री तत्काल हस्तांतरित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा
इस कार्रवाई को पंचायत व्यवस्था में एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि शासकीय धन और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का यह स्पष्ट संकेत है।
सवाल अब भी बाकी…
क्या सिर्फ निलंबन ही पर्याप्त है, या फिर वित्तीय अनियमितताओं और कथित गबन के मामलों में आगे और भी बड़ी कार्रवाई होगी? अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
Author: Man Tantra 24










