सोनहत में ‘सुशासन’ की खुली पोल: सीएम विष्णु देव साय के सामने ही भड़के भाजपा पदाधिकारी, पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने कसा तंज
मुख्य बिंदु:
- सुशासन तिहार में ही अपनी सरकार के खिलाफ फूटा भाजपा पदाधिकारी का दर्द।
- विधायक पर जनता और कार्यकर्ताओं से दूरी बनाने और नदारद रहने का लगा आरोप।
- पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने उठाए सवाल, कहा– “करोड़ों खर्च पर विकास के नाम पर ‘शून्य’।”
सोनहत/कोरिया/सुनील शर्मा: सोनहत के कुशहा गांव में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ कार्यक्रम में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सामने ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने अपनी ही सरकार और स्थानीय विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पदाधिकारी ने मंच के सामने मुख्यमंत्री को क्षेत्र की जमीनी हकीकत बताते हुए अपनी पीड़ा बयान की।
विधायक नदारद, समस्याओं की नहीं हो रही सुनवाई
भाजपा पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि क्षेत्र की विधायक जनता के बीच से पूरी तरह नदारद (गायब) रहती हैं। क्षेत्र के लोगों की समस्याओं की कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है।
”पदाधिकारी ने सिर्फ एक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि क्षेत्र की आम जनता की आवाज बनकर यह सवाल उठाया है। मुख्यमंत्री जी के पास इसका कोई ठोस जवाब नहीं था।”
– पूर्व विधायक गुलाब कमरो
पूर्व विधायक गुलाब कमरो का करारा हमला: “क्या यही सुशासन है?”
इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने वीडियो बयान जारी करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
गुलाब कमरो ने कहा, “भाजपा सरकार जिस व्यवस्था को ‘सुशासन’ बताकर ढिंढोरा पीट रही है, उसकी असली हकीकत अब उनके अपने ही पदाधिकारी मुख्यमंत्री के सामने उजागर कर रहे हैं। जब सत्तापक्ष के कार्यकर्ता ही सुरक्षित और संतुष्ट नहीं हैं, तो आम जनता का क्या हाल होगा? जनता परेशान है, कार्यकर्ता नाराज हैं और सरकार सिर्फ फिजूलखर्ची के आयोजनों में व्यस्त है।”
‘हवा-हवाई’ साबित हो रहा मुख्यमंत्री का दौरा
पूर्व विधायक ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दौरे को पूरी तरह ‘हवा-हवाई’ करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पिछले कुछ महीनों में दो बार इस क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं, लेकिन दोनों ही जिलों को विकास की कोई बड़ी सौगात या घोषणा नहीं मिली।
उन्होंने तुलना करते हुए कहा:
- पिछली कांग्रेस सरकार (भूपेश बघेल सरकार): ‘भेंट-मुलाकात’ कार्यक्रमों के दौरान हर विधानसभा में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की घोषणाएं और सौगातें तुरंत दी जाती थीं।
- वर्तमान साय सरकार: करोड़ों रुपये सरकारी आयोजनों में पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी और धरातल के विकास पर ₹1 का भी काम नहीं दिख रहा। पानी मांगने पर सिर्फ टैंकर की व्यवस्था का आश्वासन दिया जा रहा है।
राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज
सुशासन तिहार के इस विवाद के बाद क्षेत्र की राजनीति गरमा गई है। अपनी ही पार्टी के पदाधिकारी द्वारा मुख्यमंत्री के सामने स्थानीय विधायक की शिकायत किए जाने से संगठन के भीतर की गुटबाजी और असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। विपक्ष को भी सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है
Author: Man Tantra 24










