बलरामपुर: स्वास्थ्य व्यवस्था या अवैध वसूली का अड्डा? वाड्रफनगर अस्पताल में मानवता तार-तार, हक की लड़ाई में सड़क पर उतरा ‘चौथा स्तंभ’
खबर का विशेष विश्लेषण: रामहरि गुप्ता
बलरामपुर/वाड्रफनगर: छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य महकमे में ‘मुफ्त इलाज’ का दावा कितना खोखला है, इसकी एक रोंगटे खड़े कर देने वाली बानगी वाड्रफनगर के सिविल अस्पताल में देखने को मिली। जहाँ एक तरफ सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की कसमें खाती है, वहीं दूसरी तरफ जमीन पर बैठे जिम्मेदार कर्मचारी अपनी जेबें गरम करने में व्यस्त हैं। हद तो तब पार हो गई जब एक घायल मरीज की मदद करने पहुँचे पत्रकार को ही भ्रष्टाचार के खिलाफ अस्पताल की चौखट पर धरने पर बैठना पड़ा।

डॉक्टर साहब का कर्मचारी और 150 रुपये की ‘घूस’
घटना तब शुरू हुई जब सीतापुर के रहने वाले और कुर्लुडीह शिक्षा विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी को कुत्ते ने बुरी तरह काट लिया। मानवता दिखाते हुए पत्रकार विजयलाल मरकाम उन्हें लेकर वाड्रफनगर सिविल अस्पताल पहुँचे। लेकिन यहाँ इलाज से पहले ‘वसूली’ का जाल बिछा था। काउंटर पर मौजूद कर्मचारी कुशवाहा ने बिना किसी डर के पर्ची के नाम पर 150 रुपये की मांग कर दी।
जब पत्रकार ने इस अवैध वसूली का विरोध किया और अपनी जवाबदेही तय करने के लिए खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. हेमंत दीक्षित से फोन पर बात करानी चाही, तो कर्मचारी की दबंगई सामने आ गई। आरोप है कि कर्मचारी ने सत्ता और पद के मद में चूर होकर पत्रकार का फोन टेबल पर पटक दिया। यह न केवल एक व्यक्ति का अपमान था, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को दी गई सीधी चुनौती थी।
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आधी रात का हाई वोल्टेज ड्रामा और पुलिस की दस्तक
अपमान का घूंट पीकर बैठने के बजाय पत्रकार विजयलाल मरकाम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया। कड़ाके की रात में वे अस्पताल के मुख्य गेट पर ही धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते अस्पताल परिसर हंगामे और नारेबाजी के शोर से गूंज उठा। मामले की गंभीरता को देखते हुए वाड्रफनगर चौकी पुलिस और बसंतपुर थाना प्रभारी जितेन्द्र सोनी को मौके पर मोर्चा संभालना पड़ा। करीब दो घंटे तक चले भारी विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस की समझाइश और जांच के भरोसे पर धरना समाप्त हुआ।
सवाल जो सिस्टम की नींद उड़ा देंगे
यह घटना उस खौफनाक हकीकत की ओर इशारा करती है जो रोज हजारों गरीब मरीज सहते होंगे।
- क्या सरकारी अस्पतालों में अब इलाज की जगह बोली लगाई जाएगी?
- एक कर्मचारी में इतना साहस कहाँ से आता है कि वह चिकित्सा अधिकारी के सामने ही बदसलूकी पर उतारू हो जाए?
- अगर एक जागरूक पत्रकार के साथ यह सलूक है, तो उन बेबस, अनपढ़ और गरीब ग्रामीणों की क्या बिसात, जो दूर-दराज के गांवों से उम्मीद लेकर यहाँ आते हैं?

वाड्रफनगर अस्पताल की यह तस्वीर पूरे जिले के स्वास्थ्य प्रशासन के चेहरे पर एक गहरा दाग है। क्या उच्चाधिकारी इस वसूली गिरोह और बदतमीज कर्मचारियों पर नकेल कसेंगे, या फिर “जांच जारी है” का पुराना राग अलाप कर मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा? पत्रकार की इस लड़ाई ने शासन-प्रशासन को आईना दिखा दिया है, अब बारी कार्रवाई की है।
बने रहिये ‘मन तंत्र’ के साथ, हम उठाएंगे आपकी आवाज।
Author: Man Tantra 24










