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बलरामपुर: युवक की संदिग्ध मौत पर पुलिसिया कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में, परिजनों ने लगाया हत्या का आरोप

बलरामपुर/रामहरि गुप्ता। जिले के बसंतपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत फुलीडूमर में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक के परिजनों का आरोप है कि बसंतपुर थाना प्रभारी जिेंद्र कुमार सोनी और उनके अधीनस्थ कर्मचारी मामले को दबाने तथा आरोपियों को संरक्षण देने का प्रयास कर रहे हैं। न्याय की गुहार लगाने पहुंचे अनपढ़ परिजनों को थाने से फटकार कर भगाए जाने का मामला भी प्रकाश में आया है।

घटना का विवरण: साथ ले गए थे ग्रामीण, जंगल में मिली लाश

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 04 अप्रैल 2026 को फुलीडूमर निवासी सुख सिंह आयाम (पिता महावीर सिंह) को गांव के ही दो युवक—मनोज और हरिकिशन—अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर कहीं ले गए थे। जब सुख सिंह देर शाम तक घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। अगले दिन सुबह सुख सिंह का शव प्रेमनगर के जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ मिला।

परिजनों के दावे: आत्महत्या नहीं, सुनियोजित हत्या!

​घटनास्थल का निरीक्षण करने वाले ग्रामीणों और परिजनों ने इसे सीधे तौर पर ‘हत्या’ करार दिया है। उनके दावों के पीछे निम्नलिखित प्रमुख बिंदु हैं:

  • भौगोलिक स्थिति: जिस पेड़ पर लाश लटकी पाई गई, वहां स्वयं से फांसी लगाना लगभग नामुमकिन था।
  • संदिग्ध साक्ष्य: जिस गमछे का फंदा बना था, उसकी गांठें ऐसी थीं जो आत्महत्या की स्थिति में संभव नहीं लग रही हैं।
  • चोट के निशान: मृतक के कान के नीचे चोट के गहरे निशान पाए गए हैं, जो किसी संघर्ष या मारपीट की ओर इशारा करते हैं।

पुलिस की संवेदनहीनता: न्याय के लिए 10 दिन का इंतजार

​हैरानी की बात यह है कि जब पीड़ित परिवार 06 अप्रैल को रिपोर्ट दर्ज कराने बसंतपुर थाना पहुंचा, तो आरोप है कि वहां पदस्थ ASI तिवारी ने उन्हें “परेशान करने” की बात कहकर थाने से भगा दिया। परिवार के सदस्य अनपढ़ थे, जिसका फायदा उठाकर पुलिस कई दिनों तक टालमटोल करती रही।

​आखिरकार, 16 अप्रैल को जब ग्रामीणों के सहयोग से लिखित आवेदन दिया गया, तब जाकर पुलिस ने पावती (Receipt) प्रदान की। 12 दिनों तक मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई न होना पुलिस की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

“हमें थाने से डांटकर भगा दिया गया। हम अनपढ़ हैं तो क्या हमें न्याय पाने का हक नहीं है? पुलिस आरोपियों को बचा रही है।” > — मृतक के शोकाकुल परिजन

पुराना विवाद और आरोपियों की धमकी

​मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरोपी हरिकिशन पूर्व में भी ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी दे चुका है। 04 फरवरी 2026 को ग्राम पंचायत में हुई एक सामाजिक बैठक में उसने लिखित लिखित तौर पर स्वीकार किया था कि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होगा। इस दस्तावेजी साक्ष्य के बावजूद पुलिस ने अब तक आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जहमत नहीं उठाई है।

प्रमुख सवाल जो प्रशासन से पूछे जाने चाहिए:

  1. ​घटना के 12 दिन बाद तक आरोपियों से पूछताछ क्यों नहीं की गई?
  2. ​पोस्टमार्टम रिपोर्ट में देरी और परिजनों को जानकारी न देना क्या किसी साजिश का हिस्सा है?
  3. ​अनपढ़ पीड़ित परिवार के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या कार्रवाई होगी?

​अब इस संवेदनशील मामले में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो ग्रामीणों का आक्रोश उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल, सुख सिंह का परिवार न्याय की उम्मीद में दर-दर भटक रहा है।

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Author: Man Tantra 24

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