कुसमी के आश्रम-छात्रावासों में प्रभार व्यवस्था पर बड़ा सवाल!
रामहरि गुप्ता/कुसमी| बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के कुसमी विकासखंड में आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार कुछ संस्थाओं में एक ही शिक्षक अथवा शिक्षिका को दो-दो आश्रम-छात्रावासों का प्रभार दिए जाने की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, एक मामले में दूसरे विकासखंड में पदस्थ शिक्षक को कुसमी लाकर दो संस्थाओं की जिम्मेदारी दिए जाने का दावा भी किया जा रहा है।
मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि आश्रम-छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य, अनुशासन, साफ-सफाई और दैनिक निगरानी जैसी जिम्मेदारियां सीधे अधीक्षक व्यवस्था से जुड़ी होती हैं।
एक शिक्षक, दो छात्रावास… निगरानी कैसे होगी?

यदि एक ही शिक्षक या शिक्षिका को एक साथ दो छात्रावासों की जिम्मेदारी दी गई है, तो सबसे बड़ा सवाल यही है कि दोनों संस्थाओं की नियमित निगरानी किस तरह संभव होगी?
विद्यार्थियों की उपस्थिति से लेकर भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई, स्वास्थ्य, अनुशासन और सुरक्षा तक—हर व्यवस्था पर नजर रखना अधीक्षक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।

ऐसे में यदि दोनों छात्रावास अलग-अलग स्थानों पर हैं और किसी एक समय पर दोनों संस्थाओं में कोई आपात स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो प्रभारी किस संस्था में मौजूद रहेगा?
यही सवाल अब कुसमी की छात्रावास व्यवस्था को लेकर चर्चा के केंद्र में है।
दूसरे विकासखंड से शिक्षक लाकर दो संस्थाओं का प्रभार?
मामले में सबसे गंभीर दावा यह सामने आया है कि दूसरे विकासखंड में पदस्थ एक शिक्षक को कुसमी विकासखंड में लाकर दो अलग-अलग आश्रम-छात्रावासों का प्रभार सौंपा गया है।
यदि यह जानकारी सही है तो कई प्रशासनिक सवाल खड़े होते हैं।
- संबंधित शिक्षक की मूल पदस्थापना कहां है?
- उन्हें कुसमी लाने का आदेश किस अधिकारी ने जारी किया?
- क्या इसके लिए विधिवत अनुमति या एनओसी ली गई?
- दो अलग-अलग संस्थाओं का प्रभार देने का प्रशासनिक आधार क्या था?
- क्या इस पूरी प्रक्रिया के लिए विभागीय नियमों का पालन किया गया?
इन सवालों का जवाब संबंधित आदेश और दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
13 सितंबर 2023 का विभागीय पत्र भी चर्चा में
प्रभार व्यवस्था का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि विभाग द्वारा 13 सितंबर 2023 को पत्र क्रमांक एफ 9-7/2010/25-1 जारी किया गया था। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के 5 मार्च 2019 के आदेश क्रमांक एफ 1-2/2015/1/एक का उल्लेख करते हुए आश्रम एवं छात्रावासों में अधीक्षक व्यवस्था से संबंधित निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था।
ऐसे में सवाल यह है कि वर्तमान में यदि किसी एक शिक्षक को दो संस्थाओं का प्रभार दिया गया है, तो यह व्यवस्था किस आदेश और किस नियम के तहत की गई है?
बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल
आश्रम-छात्रावास कोई सामान्य कार्यालय नहीं हैं। यहां विद्यार्थी लगातार निवास करते हैं और उनकी दैनिक जरूरतों के साथ-साथ सुरक्षा की जिम्मेदारी भी विभागीय व्यवस्था पर होती है।
ऐसे में किसी बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने, सुरक्षा संबंधी घटना होने, भोजन को लेकर शिकायत आने या किसी अन्य आपात स्थिति में तत्काल निर्णय और कार्रवाई जरूरी होती है।
यदि प्रभारी एक साथ दो संस्थाओं का जिम्मेदार है, तो ऐसी स्थिति में तत्काल निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था क्या होगी—यह सवाल विभाग को स्पष्ट करना चाहिए।
मंडल संयोजक का दावा—एनओसी के बाद ही बनाया गया अधीक्षक
इस पूरे मामले में मंडल संयोजक का कहना है कि जिन लोगों को छात्रावास अधीक्षक की जिम्मेदारी दी गई है, उन्होंने एनओसी दी है और उसके बाद ही उन्हें प्रभार सौंपा गया है।
मंडल संयोजक के मुताबिक विभाग की ओर से अब एक नया आदेश भी प्राप्त हुआ है, जिसके तहत एक सप्ताह के भीतर सभी छात्रावासों में एक-एक अधीक्षक की व्यवस्था करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अब विभाग का यह नया आदेश इस विवाद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अगर एक-एक अधीक्षक जरूरी है तो पहले दोहरा प्रभार क्यों?
यहीं से सबसे बड़ा सवाल सामने आता है।
यदि विभाग अब सभी छात्रावासों में अलग-अलग अधीक्षक नियुक्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तो फिर पहले एक शिक्षक को दो संस्थाओं का प्रभार देने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या उस समय पर्याप्त अधीक्षक उपलब्ध नहीं थे?
क्या दोहरी जिम्मेदारी देने के लिए कोई विशेष प्रशासनिक आदेश था?
क्या सभी संबंधित प्रभार नियमों के अनुरूप थे?
इन सवालों का जवाब विभागीय दस्तावेजों से ही मिल सकता है।
सार्वजनिक हो अधीक्षकों की पूरी सूची
स्थानीय स्तर पर मांग उठ रही है कि कुसमी विकासखंड के सभी आश्रम-छात्रावासों की वर्तमान अधीक्षक एवं प्रभारी सूची सार्वजनिक की जाए।
इसके साथ ही प्रत्येक प्रभारी की:
मूल पदस्थापना, प्रभार आदेश क्रमांक एवं दिनांक, एनओसी और प्रभार दिए जाने का प्रशासनिक आधार
भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
विशेष रूप से यदि दूसरे विकासखंड से किसी शिक्षक को कुसमी लाकर दो संस्थाओं का प्रभार दिया गया है, तो संबंधित आदेश और उसकी प्रशासनिक आवश्यकता भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अब विभाग की कार्रवाई पर टिकी निगाह
फिलहाल उपलब्ध जानकारी और विभागीय बयानों के आधार पर यह मामला जांच और दस्तावेजों के परीक्षण का विषय है। केवल आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
लेकिन यदि एक ही शिक्षक को वास्तव में दो-दो आश्रम-छात्रावासों का प्रभार दिया गया है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि यह व्यवस्था किस नियम और किस प्रशासनिक आदेश के तहत की गई थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या कुसमी के सभी आश्रम-छात्रावासों में एक-एक अधीक्षक की व्यवस्था विभाग के बताए अनुसार एक सप्ताह में लागू होगी?
या फिर बच्चों की सुरक्षा और छात्रावासों की निगरानी से जुड़ी दोहरी प्रभार व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी?
अब निगाह विभाग की अगली कार्रवाई पर है।
Author: Man Tantra 24









