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जज्बे को सलाम: संबलपुर से ‘चारों धाम’ की साइकिल यात्रा पर निकले 3 नाबालिग छात्र, बलरामपुर में पत्रकारों और शिक्षकों ने बढ़ाया मदद का हाथ

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जज्बे को सलाम: संबलपुर से ‘चारों धाम’ की साइकिल यात्रा पर निकले 3 नाबालिग छात्र, बलरामपुर में पत्रकारों और शिक्षकों ने बढ़ाया मदद का हाथ

बलरामपुर (छत्तीसगढ़) | भक्ति और दृढ़ संकल्प की कोई उम्र नहीं होती। उड़ीसा के संबलपुर से निकले तीन नाबालिग छात्रों ने इसे सच कर दिखाया है। भीषण गर्मी और तपती धूप के बीच ये नन्हे यात्री साइकिल से ‘चारों धाम’ की यात्रा पर निकले हैं। गुरुवार को जब ये छात्र बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर पहुंचे, तो वहां मौजूद जागरूक नागरिकों ने न केवल उनकी हौसला अफजाई की, बल्कि मदद के लिए हाथ भी बढ़ाए।

भीषण गर्मी में साइकिल से तय कर रहे हजारों किमी का सफर

​विदित हो कि दिनांक 11 अप्रैल 2026 को उड़ीसा के संबलपुर से तीन छात्र—कान्हा ब्लॉगर, सत्यम आर्ट और ओडी ब्लॉगर (कृष्णा)—अपनी साइकिलों पर सवार होकर चारों धाम की यात्रा के लिए निकले थे। यात्रा के 13वें दिन, यानी 23 अप्रैल 2026 को ये छात्र बलरामपुर जिले के विकासखंड वाड्रफनगर के ग्राम पंचायत बसंतपुर स्थित ‘बिहान ढाबा’ पहुंचे।

ढाबे की परछी में खाना बनाते दिखे ‘नन्हे यात्री’

​जब पत्रकार राम हरी गुप्ता, शिक्षक परस्ते और सहायक शिक्षक शिवा यादव वहां से गुजर रहे थे, तो उनकी नजर ढाबे की परछी पर पड़ी, जहां ये तीनों बच्चे खुद अपने हाथों से खाना बना रहे थे। पूछताछ करने पर बच्चों ने बताया कि वे उड़ीसा से केदारनाथ, द्वारिका सहित चारों धामों के दर्शन के लिए निकले हैं। बच्चों के इस साहस को देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए।

मानवता की मिसाल: पत्रकार ने की आर्थिक सहायता

​तपती धूप और भीषण गर्मी को देखते हुए पत्रकार राम हरी गुप्ता ने संवेदनशीलता दिखाई। उन्होंने बच्चों को रास्ते के खर्च और पानी के लिए ₹500 की नकद राशि भेंट की। साथ ही, उन्होंने अपना मोबाइल नंबर भी बच्चों को उपलब्ध कराया और भरोसा दिया कि:

​”रास्ते में किसी भी समय, किसी भी परिस्थिति में अगर कोई समस्या आए, तो 24 घंटे में कभी भी फोन करें, आपको हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।”

​शिक्षक द्वय परस्ते और यादव ने भी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें गर्मी से बचकर यात्रा करने की सलाह दी और हर मोड़ पर सहयोग का आश्वासन दिया।

स्थानीय लोगों ने भी की मदद

​बिहान ढाबा के संचालकों द्वारा भी इन बच्चों को विश्राम और खाना बनाने के लिए जगह उपलब्ध कराकर सहयोग किया गया। ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ऐसे साहसी राहगीरों की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना समाज का दायित्व है।

शुभकामनाएं: इन नन्हे यात्रियों का जज्बा वाकई काबिले तारीफ है। हम उनकी सुरक्षित और मंगलमय यात्रा की कामना करते

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Author: Man Tantra 24

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