जय भीम के नारों से गूंजा वाड्रफनगर: गाजे-बाजे के साथ निकली भव्य रैली, बाबा साहेब को किया नमन
वाड्रफनगर/रामहरि गुप्ता: भारतीय संविधान के शिल्पकार और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती आज वाड्रफनगर में पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। प्रत्येक वर्ष की परंपरा को जीवंत रखते हुए, इस वर्ष भी रविदास पारा (बसंतपुर) से एक विशाल रैली निकाली गई, जो नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए सभा स्थल पहुंची।
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नीले जनसैलाब और गाजे-बाजे से सराबोर रहा माहौल
रैली का दृश्य अत्यंत भव्य था। सैकड़ों की संख्या में अनुयायी हाथों में पंचशील और नीले झंडे लिए, गाजे-बाजे की धुन पर थिरकते हुए सभा स्थल की ओर बढ़े। “बाबा साहेब अमर रहें” और “जय भीम” के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान रहा।
श्रद्धांजलि और विचार गोष्ठी
सभा स्थल पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में बाबा साहेब के तैलचित्र पर धूप-दीप प्रज्वलित कर और पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें सादर नमन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने डॉ. अंबेडकर के जीवन संघर्ष और समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की मुख्य बातें
सामाजिक समरसता का संदेश: वक्ताओं ने बताया कि कैसे बाबा साहेब ने अपना संपूर्ण जीवन दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
संविधान का महत्व: उपस्थित जनमानस को भारतीय संविधान और उसमें निहित अधिकारों के प्रति जागरूक किया गया।
हर्षोल्लासपूर्ण उपस्थिति: कार्यक्रम में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” — बाबा साहेब के इस मूल मंत्र को दोहराते हुए वक्ताओं ने समाज में एकता और भाईचारे को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
आज के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर बाबा साहेब के विचारों के प्रति लोगों की अटूट आस्था को प्रदर्शित किया है।
Author: Man Tantra 24










