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बलरामपुर में वन भूमि पर कब्जे का आरोप, चंद्रनगर के जंगल में क्या चल रहा है?

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रानीबार बीट P-3430 में अतिक्रमण, अवैध बोरवेल, बिजली लाइन और पोल्ट्री फार्म संचालित होने की शिकायत; वन विभाग बोला—तीसरा नोटिस जारी, कब्जा नहीं हटने पर होगी कार्रवाई

रामानुजगंज/बलरामपुर/रामहरि गुप्ता। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में वन भूमि पर कथित अतिक्रमण और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रामानुजगंज वन परिक्षेत्र के अंतर्गत चंद्रनगर स्थित रानीबार बीट क्रमांक P-3430 में बड़े पैमाने पर वन भूमि पर कब्जे की शिकायत सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में कथित तौर पर वन भूमि पर अवैध कब्जा कर बोरवेल खुदवाने, बिजली की लाइन खींचने और पोल्ट्री फार्म संचालित करने जैसी गतिविधियां की जा रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर जंगल की जमीन पर ये गतिविधियां किसकी निगरानी में चल रही हैं और जिम्मेदार विभाग अब तक क्या कार्रवाई कर पाया है?

सरकारी खर्च से पौधारोपण, फिर कहां गायब हो जाते हैं पौधे?

एक ओर सरकार पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए पौधारोपण अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर चंद्रनगर के रानीबार बीट में कथित अतिक्रमण की शिकायतें वन संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं। शिकायतों के मुताबिक, क्षेत्र में समय-समय पर तार घेराव और पौधारोपण कराया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद पौधे गायब हो जाने की बात सामने आती है।

यदि इन शिकायतों में सच्चाई है, तो इसकी जांच जरूरी है कि पौधारोपण के बाद पौधों की सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी किसने निभाई। साथ ही, सरकारी धन से कराए गए कार्यों की वास्तविक स्थिति का भी भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए।

वन भूमि पर कब्जा और खरीद-बिक्री के आरोप

स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों का आरोप है कि क्षेत्र में कुछ बिचौलियों के माध्यम से बाहर से लोगों को लाकर वन भूमि पर बसाया जा रहा है। शिकायतों में झारखंड से आए लोगों का भी उल्लेख किया गया है। आरोप यह भी है कि वन भूमि पर कब्जे के साथ उसकी कथित अवैध खरीद-बिक्री का खेल चल रहा है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित जमीन की राजस्व एवं वन अभिलेखों से जांच होना अभी आवश्यक है। यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित भूमि का वास्तविक कानूनी दर्जा क्या है, वहां किस प्रकार का कब्जा है और क्या किसी व्यक्ति के पास उस जमीन से संबंधित वैध दस्तावेज हैं।

यदि प्रशासन संबंधित लोगों के दस्तावेजों, पहचान और भूमि अभिलेखों का नियमानुसार सत्यापन कराए, तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई पर सवाल

ग्रामीणों का दावा है कि वन भूमि पर अतिक्रमण के संबंध में कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायतें दी गई हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जब मामला अधिकारियों के संज्ञान में आता है, तो नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आती है, लेकिन कथित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाती।

ऐसे में सवाल है कि यदि अतिक्रमण की शिकायतें लंबे समय से मिल रही हैं, तो अब तक कितनी जांच हुई, कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने मामलों में वास्तविक कार्रवाई की गई? इन सवालों का जवाब संबंधित विभाग की जांच और आधिकारिक अभिलेखों से ही सामने आ सकेगा।

बीट गार्ड की निगरानी पर भी उठे सवाल

चंद्रनगर स्थित रानीबार बीट P-3430 में वन भूमि की निगरानी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर बीट गार्ड मंगल सिंह के ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, उनकी ड्यूटी और उपस्थिति से संबंधित आरोपों की विभागीय पुष्टि होना बाकी है।

यदि वन क्षेत्र में नियमित निगरानी की कमी है, तो इससे अतिक्रमण और अन्य अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। इसलिए विभाग को संबंधित अवधि के उपस्थिति अभिलेखों, गश्त रजिस्टर और निगरानी व्यवस्था की जांच करनी चाहिए।

वन भूमि पर बोरवेल, बिजली लाइन और पोल्ट्री फार्म के आरोप

शिकायतों में वन भूमि पर कथित रूप से बोरवेल खनन कराने, बिजली की लाइन खींचने और व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने की बात भी कही गई है। आरोप है कि कुछ स्थानों पर पोल्ट्री फार्म चलाए जा रहे हैं और वन भूमि का इस्तेमाल निजी तथा व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।

यदि वन भूमि पर इस प्रकार की गतिविधियां बिना आवश्यक अनुमति के संचालित हो रही हैं, तो यह गंभीर जांच का विषय है। संबंधित विभागों को भूमि की स्थिति, बिजली कनेक्शन, बोरवेल और पोल्ट्री फार्म से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

वन परिक्षेत्र अधिकारी ने क्या कहा?

इस पूरे मामले में रामानुजगंज की वन परिक्षेत्र अधिकारी दिलरुबा बानो से फोन पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि अतिक्रमण करने वालों को तीसरा नोटिस जारी किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित लोगों द्वारा अतिक्रमण नहीं हटाया जाता है, तो विभाग की ओर से अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।

वन परिक्षेत्र अधिकारी के इस बयान के बाद अब निगाहें विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि नोटिस के बाद अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर कब कार्रवाई होती है और कथित अवैध गतिविधियों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है।

अब जांच और कार्रवाई का इंतजार

चंद्रनगर के रानीबार बीट P-3430 से जुड़े आरोप केवल वन भूमि पर कब्जे तक सीमित नहीं हैं। इनमें सरकारी धन से कराए गए पौधारोपण, वन क्षेत्र की निगरानी, कथित अवैध निर्माण और व्यावसायिक इस्तेमाल जैसे कई महत्वपूर्ण सवाल शामिल हैं।

अब जरूरत है कि वन विभाग और जिला प्रशासन निष्पक्ष जांच कर वन भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करें। यदि अतिक्रमण और अवैध गतिविधियों की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, पौधारोपण और तार घेराव पर खर्च हुई सरकारी राशि तथा संबंधित कार्यों की गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए।

सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या तीसरे नोटिस के बाद चंद्रनगर के जंगल को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए ठोस कार्रवाई होगी, या मामला एक बार फिर कागजी प्रक्रिया तक ही सीमित रह जाएगा?

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Author: Man Tantra 24

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