Mantantra24

धौरपुर स्कूल विवाद में नया मोड़: दो महिला शिक्षिकाओं ने लगाए गंभीर आरोप, एक माह के वेतन की मांग का दावा!

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

धौरपुर स्कूल विवाद में नया मोड़: दो महिला शिक्षिकाओं ने लगाए गंभीर आरोप, एक माह के वेतन की मांग का दावा!

15 अगस्त को नदी में पानी अधिक होने से नहीं पहुंच सकीं स्कूल, ध्वजारोहण नहीं होने के बाद बढ़ा विवाद; संकुल समन्वयक और पत्रकार पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप

वाड्रफनगर/बलरामपुर। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक शाला धौरपुर का मामला अब एक नए विवाद में बदलता नजर आ रहा है। विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण नहीं होने से जुड़े मामले में पदस्थ दो महिला शिक्षिकाओं ने संकुल समन्वयक और एक पत्रकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिकाओं ने अपने लिखित बयान में बार-बार पैसे की मांग किए जाने और मानसिक रूप से परेशान करने की बात कही है। इस मामले में 19 सितंबर 2026 की तारीख वाले लिखित बयान सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।

नदी में पानी बना परेशानी, नहीं हो सका ध्वजारोहण

शिक्षिकाओं के लिखित बयान के अनुसार, 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नदी में पानी अधिक होने के कारण वे विद्यालय नहीं पहुंच सकीं। इसके चलते स्कूल में ध्वजारोहण नहीं हो पाया। बयान में यह भी उल्लेख किया गया है कि उस दिन मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था के लिए गांव के बुजुर्गों की सहायता ली गई थी।

इस घटना के बाद विद्यालय में शिक्षकों की उपस्थिति, दुर्गम रास्ते की समस्या और स्कूल संचालन की परिस्थितियों को लेकर विवाद सामने आया।

एक माह के वेतन के बराबर राशि मांगने का आरोप

महिला शिक्षिकाओं ने अपने बयान में संकुल समन्वयक अमय कुमार जायसवाल और पत्रकार राकेश कुमार कन्नौजिया का नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि ध्वजारोहण नहीं होने के मामले को लेकर उनसे संपर्क किया गया था।

शिक्षिकाओं का दावा है कि 18 अगस्त 2026 को फोन के माध्यम से उनसे एक माह के वेतन के बराबर राशि की मांग की गई। उन्होंने आशंका जताई है कि पैसे नहीं देने की स्थिति में उन्हें परेशान किया जा सकता है।

हालांकि, कथित फोन बातचीत, पैसे की मांग और उससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नियमित स्कूल जाने के बाद भी मानसिक प्रताड़ना का दावा

लिखित बयान में दोनों शिक्षिकाओं ने कहा है कि वे 15 सितंबर 2026 से नियमित रूप से विद्यालय जाकर अध्यापन कार्य कर रही हैं। इसके बावजूद कथित तौर पर बार-बार पैसे की मांग किए जाने से वे मानसिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की है।

शिक्षिकाओं ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने अपना पक्ष बिना किसी भय या दबाव के रखा है। उपलब्ध दस्तावेजों पर 19 सितंबर 2026 की तारीख अंकित है।

अब जांच से ही सामने आएगी सच्चाई

यह मामला केवल स्वतंत्रता दिवस पर ध्वजारोहण नहीं होने तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें एक ओर दुर्गम रास्ते और नदी पार कर विद्यालय पहुंचने की व्यावहारिक समस्या है, तो दूसरी ओर महिला शिक्षिकाओं द्वारा लगाए गए कथित आर्थिक मांग और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप हैं।

ऐसे में संबंधित शिक्षा अधिकारियों को विद्यालय की वास्तविक परिस्थितियों, शिक्षिकाओं की उपस्थिति, कथित फोन बातचीत और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। जांच में सभी संबंधित पक्षों के बयान लेकर तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।

महत्वपूर्ण पक्ष: यह समाचार उपलब्ध लिखित बयानों और दस्तावेजों पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित संकुल समन्वयक अमय कुमार जायसवाल और पत्रकार राकेश कुमार कन्नौजिया का पक्ष प्राप्त नहीं होने के कारण उनकी प्रतिक्रिया शामिल नहीं की गई है। उनका पक्ष मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

Man Tantra 24
Author: Man Tantra 24

Leave a Comment

और पढ़ें