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फर्जी पट्टे का मामला: जिला वन अधिकार समिति की कार्रवाई पर उठे सवाल

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जांच के बाद पट्टा निरस्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी, 20 मार्च को जिला समिति को भेजा गया प्रकरण; पांच माह से अधिक समय बाद भी अंतिम कार्रवाई का इंतजार

वाड्रफनगर/बलरामपुर। धनवार में राष्ट्रीय राजमार्ग बनारस रोड किनारे स्थित 0.14 हेक्टेयर भूमि के वन अधिकार पट्टे को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बसंतपुर निवासी राम हरी गुप्ता ने संबंधित पट्टे को नियम विरुद्ध एवं फर्जी तरीके से जारी किए जाने का आरोप लगाते हुए बलरामपुर कलेक्टर के जनदर्शन में शिकायत की थी। शिकायत के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच में पट्टे से संबंधित कई गंभीर विसंगतियां सामने आईं, इसके बावजूद अब तक अंतिम रूप से पट्टा निरस्त नहीं किया गया है।

कलेक्टर के निर्देश पर गठित हुई जांच टीम

प्राप्त जानकारी के अनुसार, राम हरी गुप्ता की शिकायत पर कलेक्टर बलरामपुर द्वारा मामले की जांच एसडीएम वाड्रफनगर को सौंपी गई। इसके बाद एसडीएम द्वारा पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की गई, जिसकी अध्यक्षता वाड्रफनगर तहसीलदार ने की।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, जांच के दौरान संबंधित वन अधिकार पट्टे से जुड़े दस्तावेजों एवं तथ्यों की पड़ताल की गई। जांच में पट्टे की पात्रता और संबंधित व्यक्ति के पुराने निवास एवं भूमि संबंधी रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठने की बात कही गई है।

नाबालिग होने का भी किया गया उल्लेख

शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि विशाल कश्यप के पिता मूलतः उत्तर प्रदेश के निवासी थे तथा उन्होंने वर्ष 1993-94 में बसंतपुर के जमई में जमीन खरीदकर मकान बनाकर निवास शुरू किया था।

वहीं, जिस अवधि से संबंधित वन अधिकार पट्टे का मामला जुड़ा है, उस समय विशाल कश्यप के नाबालिग होने का भी उल्लेख जांच में किए जाने की बात शिकायतकर्ता द्वारा कही गई है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर संबंधित पट्टे की वैधता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

ग्राम पंचायत से लेकर अनुभाग समिति तक हुई कार्रवाई

मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई जा रही है कि ग्राम पंचायत वन अधिकार समिति द्वारा जांच के बाद संबंधित पट्टे को निरस्त करने की कार्रवाई करते हुए प्रकरण तहसीलदार वाड्रफनगर को सौंपा गया था।

इसके बाद अनुभाग स्तरीय वन अधिकार समिति द्वारा भी प्रकरण पर विचार किया गया और संबंधित पट्टे को निरस्त करने का निर्णय लिए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया गया है कि अनुभाग स्तरीय समिति के निर्णय के बाद 20 मार्च 2026 को प्रकरण जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के अध्यक्ष एवं कलेक्टर बलरामपुर के समक्ष भेजा गया।

पांच माह से अधिक समय बाद भी अंतिम निर्णय का इंतजार

प्रकरण जिला स्तरीय वन अधिकार समिति के समक्ष भेजे जाने के बाद अब पांच माह से अधिक समय बीत चुका है। बावजूद इसके, शिकायतकर्ता के अनुसार, संबंधित पट्टे को निरस्त करने की अंतिम कार्रवाई अब तक नहीं हुई है।

इसी को लेकर अब जिला वन अधिकार समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि जब निचले स्तर की समितियों द्वारा जांच एवं कार्रवाई की प्रक्रिया पूरी कर प्रकरण जिला स्तर तक भेज दिया गया है, तो अंतिम निर्णय में इतनी देरी क्यों हो रही है।

शिकायतकर्ता ने मांगी शीघ्र कार्रवाई

राम हरी गुप्ता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले में उपलब्ध दस्तावेजों एवं जांच रिपोर्ट के आधार पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। यदि संबंधित वन अधिकार पट्टा नियमों के विपरीत अथवा फर्जी तरीके से जारी किया जाना जांच में प्रमाणित होता है, तो उसे तत्काल निरस्त करते हुए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

फिलहाल, मामले में जिला स्तरीय वन अधिकार समिति की ओर से अंतिम निर्णय और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। प्रशासन की ओर से लिए जाने वाले निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पट्टा किन आधारों पर जारी हुआ था और उसे निरस्त करने की कार्रवाई में देरी का वास्तविक कारण क्या है।

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Author: Man Tantra 24

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