थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर: फर्जी मुकदमों और अत्याचार का पर्याय!! कार्यवाही कब करोगे सरकार?

नईगढ़ी/प्रकाश द्विवेदी – मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी थाना प्रभारी जगदीश सिंह ठाकुर का नाम आज एक विवादास्पद हस्ती बन चुका है। उनके कार्यकाल में फर्जी मुकदमों की लंबी सूची और निर्दोष लोगों पर अत्याचार की घटनाएं सामने आई हैं, जो पुलिस की छवि को धूमिल करने वाली हैं। कई शिकायतकर्ताओं ने उनके खिलाफ मानवाधिकार आयोग तक गुहार लगाई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता तक सीमित रही है।
एक घटना का खुलासा
साल 2022 में, जब ठाकुर बिछिया थाने में पदस्थ थे, जमीन कारोबारी आशीष द्विवेदी उर्फ राज द्विवेदी के साथ एक गंभीर घटना घटी। भू-माफिया के दबाव के बाद उन्हें रात 8 बजे जबरन थाने लाया गया, जहां तीसरी डिग्री और प्रताड़ना के बाद अनुबंध तोड़ने को मजबूर किया गया। बिना तहसीलदार के सामने पेश किए धारा 151 के तहत उन्हें रीवा सेंट्रल जेल भेजा गया। जमानत पर रिहा होने के बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक और मानवाधिकार आयोग से न्याय की मांग की। जांच में दोष सिद्ध हुआ, पर ठाकुर पर कार्रवाई न होकर उन्हें नईगढ़ी स्थानांतरित कर दिया गया।
समाजसेवी कुंज बिहारी तिवारी पर फर्जी डकैती का मुकदमा
अगस्त क्रांति मंच के संयोजक और सामाजिक कार्यकर्ता कुंज बिहारी तिवारी पर फर्जी डकैती का मुकदमा दर्ज करना ठाकुर की निरंकुशता का एक और उदाहरण है। इस मामले में जिन गवाहों के नाम शामिल किए गए, उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऑडियो जारी कर स्पष्ट किया कि उनके हस्ताक्षर जबरन कराए गए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी किसी चोरी या अपराध में भाग नहीं लिया, बल्कि राजनीतिक दबाव में यह साजिश रची गई। चौंकाने वाली बात यह है कि सभी गवाह बीजेपी के नेता और पदाधिकारी हैं, जो इस मामले में संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। यह घटना न केवल ठाकुर की मनमानी को उजागर करती है, बल्कि पुलिस और राजनीतिक सत्ता के गठजोड़ को भी दर्शाती है।
पुलिस मुख्यालय के आदेश का उल्लंघन

पुलिस मुख्यालय भोपाल ने स्पष्ट निर्देश जारी किया था कि जिस पुलिस अधिकारी पर जांच चल रही हो, उसे थाना प्रभारी जैसे संवेदनशील पद पर नियुक्त न किया जाए। इसके बावजूद ठाकुर को नईगढ़ी थाना प्रभारी बनाया गया, जो नियमों की openly अवहेलना है। यह कदम पुलिस प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है और यह संकेत देता है कि ठाकुर को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्रवाई टाल दी जाती है।
नईगढ़ी में थाना प्रभारी की निरंकुशता
नईगढ़ी में ठाकुर ने निर्दोष लोगों, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमे दर्ज किए। एक 80 वर्षीय बुजुर्ग पर पेट्रोल को शराब बताकर मुकदमा ठोंका गया, जबकि हकरिया गांव में गांजा तस्करी के खिलाफ शिकायत करने वाले जितेंद्र मिश्रा और उनकी पत्नी को बिना महिला पुलिस के थाने में बंद कर जेल भेजा गया। पत्रकार मिथिलेश त्रिपाठी पर भी फर्जी वसूली का मुकदमा लगाया गया। मुद्रिका कोल हत्याकांड और नाबालिग अनूप चंद शर्मा की हत्या जैसे मामलों में भी पीड़ितों को न्याय से वंचित रखने का आरोप है।
राजनीतिक संरक्षण और जनता का भरोसा
ठाकुर पर राजनीतिक संरक्षण के दम पर इन कृत्यों को अंजाम देने का आरोप लगातार गहराता जा रहा है। मानवाधिकार आयोग ने आशीष द्विवेदी को मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन उन्होंने इसे ठुकराते हुए दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। कुंज बिहारी तिवारी ने पुलिस महानिदेशक और अधीक्षक से उच्च स्तरीय जांच और ठाकुर समेत संरक्षकों पर कार्रवाई की मांग की है। ठाकुर के कृत्यों से पुलिस पर जनता का भरोसा कमजोर हुआ है।
जनता को पुलिस कप्तान और मोहन से उम्मीद
जगदीश सिंह ठाकुर का मामला पुलिस तंत्र में सुधार और जवाबदेही की मांग को मजबूती देता है। नियमों की अवहेलना और फर्जी मुकदमों के जरिए निर्दोषों को प्रताड़ित करने की घटनाएं पुलिस की साख को खतरे में डाल रही हैं। क्या इस बार न्याय की उम्मीद पूरी होगी और ठाकुर जैसे विवादित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी, यह देखना बाकी है।
Author: mantantra24





