भ्रष्टाचार पर एसीबी का प्रहार: 20 हजार की रिश्वत लेते पटवारी पकड़ा गया, आम जनता में गुस्सा!
सुनील शर्मा/सक्ती: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने एक और बड़ी कार्रवाई कर भ्रष्ट अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है। 02 मई 2025 को एसीबी की बिलासपुर इकाई ने तहसील हसौद के ग्राम कैथा में पदस्थ पटवारी पवन सिंह को 20,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा। यह कार्रवाई पटवारी कार्यालय गुजिया बोड़ में हुई, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। यह घटना आम जनता के बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ गुस्से को और भड़काने वाली साबित हो रही है, जो लंबे समय से ऐसे अधिकारियों की मनमानी से परेशान है।
क्या है पूरा मामला?
ग्राम कैथा के निवासी रामशरण कश्यप ने 26 अप्रैल 2025 को एसीबी बिलासपुर में शिकायत दर्ज की थी। रामशरण ने बताया कि उनके पिता और चाचा के नाम पर गाँव में जमीन है, लेकिन खसरा नंबर 321/2 और 1592/2 उनके पिता के नाम पर बी-वन ऑनलाइन रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा था। इसके लिए उनके पिता ने एसडीएम ऑफिस में त्रुटि सुधार का आवेदन दिया था। एसडीएम ने तहसीलदार को रिकॉर्ड दुरुस्त करने का आदेश दिया, और तहसीलदार ने यह जिम्मेदारी कैथा के पटवारी पवन सिंह को सौंपी। लेकिन जब रामशरण पटवारी से मिले, तो पवन सिंह ने रिकॉर्ड ठीक करने के लिए 20,000 रुपये की रिश्वत माँगी।

रामशरण ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और एसीबी से संपर्क किया। एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया और सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना बनाई। 02 मई को रामशरण को 20,000 रुपये लेकर पटवारी के पास भेजा गया। जैसे ही पवन सिंह ने रिश्वत की रकम ली, एसीबी की टीम ने उसे रंगे हाथ धर दबोचा। रिश्वत की रकम बरामद कर ली गई, और पवन सिंह के खिलाफ धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। उसे जल्द ही न्यायालय में पेश किया जाएगा। पवन सिंह बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम अधौरा का निवासी है।
सक्ती जिले में तीसरी कार्रवाई, भ्रष्टाचार पर नकेल कसने की कोशिश
एसीबी सूत्रों ने बताया कि सक्ती जिले में पिछले चार महीनों में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले भी दो भ्रष्ट अधिकारियों को रिश्वत लेते पकड़ा गया था। एसीबी ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी मुहिम रुकने वाली नहीं है। सूत्रों ने कहा, “हमारा मकसद आम जनता को भ्रष्टाचार से राहत दिलाना है। जो भी भ्रष्ट अधिकारी जनता का हक मारने की कोशिश करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
आम जनता में उबाल, भ्रष्टाचार के खिलाफ माँग तेज
इन घटनाओं ने आम जनता में भ्रष्टाचार के प्रति गुस्से को और बढ़ा दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक छोटे-मोटे अधिकारी उनकी मेहनत की कमाई और हक को इस तरह लूटते रहेंगे? रामशरण कश्यप ने कहा, “हम गरीब लोग हैं, जमीन ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। लेकिन ये पटवारी हमसे रिश्वत माँगते हैं, नहीं तो काम नहीं करते। मैंने हिम्मत करके एसीबी से शिकायत की, लेकिन कितने लोग ऐसा कर पाते हैं?”
स्थानीय लोगों का कहना है कि भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि कई बार वे मजबूरी में रिश्वत दे देते हैं, क्योंकि काम रुकने से उनकी जिंदगी पर असर पड़ता है। लेकिन अब एसीबी की लगातार कार्रवाइयों से लोगों में उम्मीद जगी है। एक ग्रामीण ने कहा, “अगर ऐसे ही कार्रवाई होती रही, तो इन भ्रष्ट अधिकारियों को सबक मिलेगा और हमारा हक हमें आसानी से मिल सकेगा।”
भ्रष्टाचार का जाल: एक बड़ी चुनौती
पटवारी जैसे निचले स्तर के अधिकारी ग्रामीण इलाकों में आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संपर्क होते हैं। जमीन के रिकॉर्ड, बँटवारा, और अन्य दस्तावेजों के लिए लोग इन्हीं पर निर्भर रहते हैं। लेकिन कई पटवारी इस जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हैं और रिश्वत के बिना काम करने को तैयार नहीं होते। यह भ्रष्टाचार न केवल लोगों का हक छीनता है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को भी बदतर बनाता है।
एसीबी की कार्रवाइयों से भले ही कुछ राहत मिल रही हो, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सिस्टम में बड़े बदलाव की जरूरत है। इसमें पारदर्शिता बढ़ाने, ऑनलाइन सिस्टम को मजबूत करने, और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान शामिल है। साथ ही, लोगों को भी जागरूक होने और रिश्वत देने से बचने की जरूरत है।
Author: mantantra24





