गर्मी की तपिश और पशु अस्पताल का ताला: एक मूक पीड़ा
गर्मी का मौसम अपने चरम पर है। सूरज की किरणें धरती को झुलसा रही हैं, और इस तपते हुए वातावरण में इंसान तो इंसान, पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। ऐसे में, अगर कोई पशु बीमार हो जाए, घायल हो जाए, या उसे तत्काल चिकित्सा की जरूरत पड़े, तो उसका सहारा कौन बनेगा? पिछले 9 दिनों से एक पशु अस्पताल के दरवाजे बंद हैं—यह खबर सुनकर मन में एक अजीब सी बेचैनी और गुस्सा उमड़ता है। क्या यह सिर्फ एक इमारत का बंद होना है, या उन मूक प्राणियों के प्रति हमारी संवेदनशीलता का मर जाना?
पशुओं की अनसुनी पुकार…
तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार ने गायों और पशुओं के लिए गौठान तो बनवाया पर अभी उनकी क्या हालत है ये पूरा प्रदेश अच्छी तरह जानता है।सड़कों पर गाय,भैंस और अन्य जानवर इस भीषण गर्मी में पानी और छाया की तलाश में भटक रहे हैं। कई बार दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं, कई बार बीमारी उन्हें जकड़ लेती है। ऐसे में पशु अस्पताल उनकी आखिरी उम्मीद होते हैं। लेकिन जब वह उम्मीद भी दरवाजे पर ताला लटकाए खड़ी हो, तो इन बेजुबानों का दर्द कौन सुनेगा? क्या हमारा समाज और सुशासन की सरकार इतनी असंवेदनशील हो गई है कि 9 दिन बीत जाने के बाद भी किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया?
गर्मी का कहर और लापरवाही का जख्म
गर्मी सिर्फ प्यास और थकान नहीं लाती, यह डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और कई गंभीर बीमारियों को भी साथ लाती है। एक पशु चिकित्सक की नजर में यह समय सबसे व्यस्त और चुनौतीपूर्ण होता है। फिर आखिर क्या वजह है कि यह अस्पताल 9 दिनों से बंद पड़ा है? क्या यह स्टाफ की कमी है, संसाधनों का अभाव है, या फिर सरकारी उदासीनता का नतीजा? तो हम बताते हैं आपको पूरी सच्चाई…
बीते कुछ दिनों पहले कोरिया जिला मुख्यालय में संचालित सरकारी हेचरी में बर्ड फ्लू ने दस्तक दी और नतीजतन कोरिया जिला प्रशासन ने आवश्यक कार्यवाही की। लेकिन उस अभियान के बाद बाकी जितने भी संबंधित विभाग के कर्मचारी बर्ड फ्लू की रोकथाम में शामिल थे उनमें से कुछ अधिकारियों को अपने मूल कार्य में वापस भेज दिया गया या तो उन्हें अपने पद स्थापना के ही स्थान पर बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए कहा गया लेकिन हद तो तब हो गई जब कोरिया जिला के पौड़ी बचरा मैं संचालित पशु विभाग के अस्पताल में कार्यरत सभी 3 स्टाफ,डॉक्टर सौरव बनर्जी,तिवारी लाल बेक और निलेशवर तिवारी को अस्पताल बंद करके कोरिया जिला के बॉर्डर पर गाड़ियों की चेकिंग के कार्य पर लगा दिया गया। अब समझिए कि पिछले 10 दिनों से पशु चिकित्सालय पूरी तरह से बंद है और पशु सर्जन जैसे द्वितीय लेवल के अधिकारी पेड़ों के नीचे गाड़ियों की चेकिंग का कार्य कर रहे हैं। जबकि यह कार्य मूलतः पुलिस विभाग के संरक्षण में होना चाहिए था। जब इस मामले पर कोरिया जिला के पशु उपसंचालक विभा सिंह बघेल से,स्थिति जानने, पशु चिकित्सालय के बंद होने और द्वितीय ग्रेड के सर्जन को गाड़ी चेकिंग के कार्य पर लगाए जाने के लिए, फोन पर बात करने की कोशिश की गई तो मैडम साहिबा ने फोन ही नहीं उठाया… अब समझिए कि यह इतने जिम्मेदार और काबिल अधिकारी हैं कि इनसे बात या तो इनके ऊपर लेवल का अधिकारी कर सकता है या तो कोई विधायक या मंत्री!! नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह से विभा सिंह बघेल,एक सर्जन को चेकिंग का कार्य करातीं है और पशु चिकित्सालय को बंद रखने पर विवश करती है, क्षेत्र वासियों के मौलिक अधिकारों का हनन करतीं हैं तो क्या ऐसे अधिकारियों पर प्रशासन कोई कार्यवाही करेगा?? तो समझा आपने हर बीता दिन उन जानवरों के लिए एक अनंत कष्ट की तरह है, जो अपनी पीड़ा को शब्दों में बयां नहीं कर सकते।
एक समाज के रूप में हमारी जिम्मेदारी
पशु हमारे पर्यावरण का अभिन्न हिस्सा हैं। वे न सिर्फ हमारे जीवन को संतुलित रखते हैं, बल्कि कई बार हमारी भावनाओं के साथी भी बनते हैं। फिर हम उनकी इस हालत को कैसे नजरअंदाज कर सकते हैं? यह सिर्फ एक अस्पताल के बंद होने की बात नहीं है, यह हमारी सामूहिक संवेदना और जिम्मेदारी का सवाल है।
आवाज उठाने का समय
अब वक्त आ गया है कि इस मुद्दे पर आवाज उठाई जाए। स्थानीय प्रशासन से जवाब माँगा जाए कि आखिर यह पशु अस्पताल कब खुलेगा। क्या कोई वैकल्पिक व्यवस्था की गई है? स्वयंसेवी संगठनों और पशु प्रेमियों को आगे आना होगा। अगर सरकार या प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा, तो हमें खुद पहल करनी होगी—चाहे वह अस्थायी चिकित्सा शिविर लगाने की बात हो या फिर ऐसे अधिकारियों की मनमानी का मामला हो….
Author: mantantra24





