समाधान शिविर में भारी हंगामा, जनप्रतिनिधियों ने किया सामूहिक बहिष्कार,देखे वीडियो

बलरामपुर: समाधान शिविर में भारी हंगामा, जनप्रतिनिधियों ने किया सामूहिक बहिष्कार

बलरामपुर। जिले के बरतीकलॉ में आयोजित जिला स्तरीय समाधान शिविर उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी झड़प हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों ने एक साथ शिविर का बहिष्कार कर दिया, जिससे प्रशासनिक खेमे में हड़कंप मच गया।

हाई स्कूल मैदान में विवाद की शुरुआत

​जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण के लिए बरतीकलॉ हाई स्कूल मैदान में विशाल समाधान शिविर का आयोजन किया गया था। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सामंजस्य की कमी साफ नजर आई।

एसडीएम और तहसीलदार से तीखी बहस

​मिली जानकारी के अनुसार, जनसमस्याओं के समाधान की प्राथमिकता और अधिकारियों के कार्य करने के तरीके को लेकर जनपद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की एसडीएम एवं तहसीलदार से सीधी बहस हो गई। बहस देखते ही देखते इतनी उग्र हो गई कि जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन पर तानाशाही और उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाया।

जनप्रतिनिधियों का आरोप: “प्रशासन जनप्रतिनिधियों के सुझावों को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जब हमारी बातों की अहमियत नहीं है, तो जनता की समस्याओं का सही निराकरण कैसे होगा? प्रशासन का रवैया पूरी तरह नकारात्मक है।”

सामूहिक बहिष्कार से मचा हड़कंप

​नाराज जनप्रतिनिधियों ने एक सुर में शिविर का सामूहिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया और कार्यक्रम स्थल से बाहर निकल गए। जनप्रतिनिधियों के इस कड़े रुख से शिविर की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित रही और वहां मौजूद ग्रामीणों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई।

प्रशासन ने जारी रखा शिविर

​विवाद और बहिष्कार के बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने शिविर को बंद नहीं किया। अधिकारियों का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप आम जनता की समस्याओं को सुनना और उनका निराकरण करना उनकी पहली प्राथमिकता है। जनप्रतिनिधियों के जाने के बाद भी आवेदन लेने और उनके निपटारे की प्रक्रिया जारी रही।

प्रशासनिक-राजनीतिक टकराव के संकेत

​इस घटना ने बलरामपुर जिले में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की भारी कमी को उजागर कर दिया है। जानकारों का मानना है कि यदि इस तरह के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में तालमेल नहीं रहा, तो इसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

​अब देखना यह होगा कि इस गतिरोध को दूर करने के लिए जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है और आगामी शिविरों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाती है।

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Author: mantantra24

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