रायपुर, 25 फरवरी 2026/राम हरि गुप्ता/मन तंत्र। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) छत्तीसगढ़ ने गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। संचालनालय ने सभी संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा संभाग और जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि गैर शिक्षकीय कार्यों में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए और उन्हें उनकी मूल पदस्थापना वाली शालाओं में वापस भेजा जाए।
आदेश में क्या कहा गया है
24 फरवरी 2026 को जारी पत्र में DPI ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि विभाग में कार्यरत कई शिक्षक और कर्मचारी अपनी मूल शैक्षणिक सेवाओं को छोड़कर विभिन्न कार्यालयों और संस्थाओं में गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न हैं। संचालनालय ने इसे गंभीर प्रशासनिक और शैक्षणिक चिंता का विषय बताया है।
आदेश के अनुसार:
गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षकों का संलग्नीकरण तत्काल समाप्त किया जाए।
संबंधित शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना शालाओं में उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।
की गई कार्रवाई की जानकारी संचालनालय को भेजी जाए।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकार के संलग्नीकरण से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ता है।
2024 के शासन आदेश का भी दिया गया हवाला
DPI ने अपने आदेश में 28 फरवरी 2024 को स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों का भी संदर्भ दिया है। उस आदेश में राज्य शासन ने DPI, कमिश्नर, कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया था कि गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न शिक्षक संवर्ग के कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें मूल शालाओं में वापस भेजा जाए।
शासन स्तर पर लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बड़ी संख्या में शिक्षक विभिन्न कार्यालयों में पदस्थ होकर गैर शिक्षकीय कार्य कर रहे हैं, जिससे स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
बड़ा सवाल: क्या इस बार आदेश का होगा पालन या फिर “जुगाड़ तंत्र” रहेगा हावी?
DPI का यह आदेश निश्चित रूप से सख्त और स्पष्ट है, लेकिन इससे भी बड़ा सवाल सिस्टम की कार्यप्रणाली पर खड़ा होता है।
वास्तविकता यह है कि शासन और विभाग द्वारा पहले भी इस तरह के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं, इसके बावजूद कई जिलों और कार्यालयों में आज भी शिक्षक और कर्मचारी वर्षों से गैर शैक्षणिक कार्यों में संलग्न हैं।
सूत्र बताते हैं कि कुछ अधिकारी “जुगाड़ तंत्र” के जरिए अपने पसंदीदा कर्मचारियों को कार्यालयों में संलग्न कर लेते हैं, जिससे वे मूल स्कूलों में वापस नहीं जाते।
अब सवाल यह उठता है:
क्या DPI का यह नया आदेश ऐसे अधिकारियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचेगा?
क्या अब तक शासन के आदेशों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी?
या फिर यह आदेश भी कागजों तक सीमित रह जाएगा और जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहेगी?
जिम्मेदारी तय होगी या फिर आदेश बनकर रह जाएगा औपचारिकता?
शिक्षा व्यवस्था की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि शिक्षक स्कूलों में रहें, न कि कार्यालयों में गैर शैक्षणिक कार्य करते रहें। DPI का यह कदम निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लेकिन अब सबसे अहम बात यह होगी कि जिला और संभाग स्तर के अधिकारी इस आदेश का कितना गंभीरता से पालन करते हैं।
क्योंकि सवाल सिर्फ आदेश जारी करने का नहीं, बल्कि उसके वास्तविक क्रियान्वयन का है।
Author: mantantra24




