डामर नहीं सड़क पर दलाली बिछी थी, 1 दिन भी नहीं टिक सकी लाखों की सड़क!! डबल इंजन का विकाश मॉडल फुस्स,गजब की लूट हैं भाई!!

डामर नहीं सड़क पर दलाली बिछी थी, 1 दिन भी नहीं टिक सकी लाखों की सड़क!!

विकाश का ‘बीजेपी मॉडल’ फुस्स

एमसीबी/सुनील शर्मा। छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय सरकार के सुशासन के दावे अब ज़मीन पर ही दम तोड़ते नज़र आ रहे हैं। हालात ऐसे बन चुके हैं कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार उसकी नींव में डाल दिया जाता है। न ठेकेदारों को किसी कार्रवाई का डर है, न अधिकारियों को जवाबदेही की चिंता।

 

राज्य में विकास नहीं, लूट का खुला खेल चल रहा है।भ्रष्टाचार का ताज़ा और शर्मनाक मामला सामने आया है एमसीबी जिले के खड़गवां ब्लॉक से, जहां ग्राम पंचायत कदरेवा, भूकभकी और बरबसपुर सहित आस पास के कई ग्राम पंचायत में सड़क मरम्मत के नाम पर जनता की आंखों में धूल झोंकी गई।
जिस सड़क को महीनों चलना चाहिए था, वह एक दिन भी नहीं टिक सकी।
ठेकेदार ने सड़क बनाई और कुछ ही घंटों में वह राख की तरह उखड़ने लगी।

हाथ से उखड़ती सड़क, सिस्टम की पोल खोलती तस्वीर

सड़क की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि ग्रामीण उंगलियों से डामर उखाड़ रहे हैं।
ना सही डामर, ना निर्धारित मोटाई, ना तकनीकी मानकों का पालन।
👉 सड़क की मोटाई सिर्फ 4–5 मिमी
👉 मिट्टी के ऊपर सीधे डामर बिछाया गया
👉 न बेस तैयार, न रोलर से सही कम्पैक्शन
यह निर्माण नहीं, सीधा घोटाला है।

 

विरोध करने पर धमकी: “सेटिंग ऊपर तक है”

जब ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का विरोध किया तो ठेकेदार के लोगों ने खुलेआम कहा—
“हमारी सेटिंग ऊपर तक है, जो करना है कर लो।”
यह बयान सिर्फ घमंड नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर एक तमाचा है।

अधिकारियों की चुप्पी: मौन नहीं, खुली सहमति

सब कुछ सामने होने के बावजूद प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह मौन हैं।
यह चुप्पी अनजान होने की नहीं, बल्कि खुले संरक्षण की गवाही देती है।
अधिकारी जानते हैं—
सड़क बनते ही उखड़ गई!
मानकों की खुलेआम अनदेखी हुई!
जनता के पैसे की लूट हुई!
फिर भी कोई कार्रवाई नहीं।

 

बीजेपी सरकार में भ्रष्टाचार को अभयदान?

केंद्र और राज्य—दोनों जगह बीजेपी की सरकार होने के बाद अब ऐसा लगता है कि भ्रष्टाचारियों को खुला अभयदान मिल चुका है। जनता का पैसा लूटो, घटिया काम करो,और अंत में मंच से बस एक नारा लगाओ—
“जय श्रीराम” धर्म के नाम पर वोट अपने-आप मिल जाएंगे—शायद यही सोच अब शासन की कार्यशैली बन चुकी है।

 

तीनों मिले हुए हैं—सरकार, अफसर और ठेकेदार

यह मामला साफ बताता है कि—
सत्ता में बैठी सरकार
प्रशासन में बैठे अधिकारी
ज़मीन पर भ्रष्टाचार करता ठेकेदार
तीनों की जवाबदेही खत्म हो चुकी है।जनता का डर समाप्त हो चुका है।
अब सवाल यह नहीं कि सड़क क्यों उखड़ी,
सवाल यह है कि क्या सिस्टम पूरी तरह सड़ चुका है?

mantantra24
Author: mantantra24

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