पल्स पोलियो अभियान: स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत से कोरिया जिले के पोड़ी बचरा तहसील में 93% लक्ष्य पहले ही दिन पूरा
कोरिया/सुनील शर्मा – 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत पहले ही पोलियो मुक्त देश घोषित हो चुका है, लेकिन हाल के दिनों में विदेशों में सामने आए कुछ पोलियो मामलों को देखते हुए भारत सरकार ने सतर्कता बरतते हुए एक बार फिर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने 21 दिसंबर से 23 दिसंबर तक देशभर में विशेष पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान चलाने का निर्णय लिया, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की आशंका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

भारत सरकार और राज्य सरकार की इस मंशा को ज़मीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर पूरी सक्रियता के साथ मैदान में उतरा। अभियान के पहले ही दिन जगह-जगह पोलियो बूथ लगाकर छोटे बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई। स्वास्थ्य विभाग की तत्परता और मेहनत का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कोरिया जिले के पोड़ी-बचरा तहसील क्षेत्र में बनाए गए 84 पोलियो बूथों के माध्यम से पहले दिन ही 5353 बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई गई, जो कि कुल लक्ष्य का 93 प्रतिशत है।

यह आंकड़ा साफ तौर पर बताता है कि स्वास्थ्य कर्मी किस समर्पण और जिम्मेदारी के साथ सरकार की मंशा को पूरा करने में जुटे हुए हैं। जब इस संबंध में स्वास्थ्य अधिकारियों से बातचीत की गई, तो उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा तीन दिनों में 100 प्रतिशत टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहले ही दिन 93 प्रतिशत बच्चों को पोलियो ड्रॉप पिलाई जा चुकी है और अब दूसरे दिन घर-घर जाकर शेष बच्चों को ड्रॉप पिलाकर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

इस पूरे पल्स पोलियो अभियान को सफल बनाने में सुपरवाइजर बीईई रामकुमार इंद्रलाल कनौजिया, पोलियो सुपरवाइजर अरविंद सिंह, माध्यम सिंह, उद्यान सिंह, रामरति सिंह, निरंजन सिंह (RHO), सेकेंड एएनएम, मितानिन, एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा। सभी ने एक टीम की तरह काम करते हुए बच्चों तक पोलियो ड्रॉप पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम की सफलता के लिए जिला कलेक्टर महोदया एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया गया और स्वास्थ्य कर्मियों का हौसला बढ़ाया गया। प्रशासनिक सहयोग और ज़मीनी स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत ने यह साबित कर दिया कि जब नीयत मजबूत हो, तो किसी भी लक्ष्य को समय से पहले हासिल किया जा सकता है।
यह अभियान न केवल सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि उन स्वास्थ्य कर्मियों की निस्वार्थ सेवा और समर्पण को भी उजागर करता है, जो हर बच्चे के सुरक्षित भविष्य के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
Author: mantantra24





