प्रातापपुर के विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति परमान-पत्र मं बवाल! हाईकोर्ट के आदेश के बाद घलो कारवाही नई, अब आदिवासी समाज देहे आंदोलन के चेतावनी
रायपुर/सरगुजा | खास रिपोर्ट/सुनील शर्मा छत्तीसगढ़ मं अब फेर एक झन अपन जाति परमान-पत्र के मामला ले राजनीतिक आग भड़क गे हवय। प्रतापपुर विधानसभा के विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ऊपर फर्जी जाति परमान-पत्र बनाय के आरोप लगत हावे। हाईकोर्ट के आदेश आइस, फेर कारवाही नई होइस — अब आदिवासी समाज मं गुस्सा उमरत हावे।
⚖️ बिना ठोस आधार के जारी होइस परमान-पत्र?
मिलत जानकारी मुताबिक, विधायक पोर्ते के जाति परमान-पत्र ना त वोकर पिता के असली कागज ऊपर बनाय गे हे, ना कोई ठोस दस्तावेज ऊपर।
आरोप हावे कि बिना कानूनी सबूत के वोला अनुसूचित जनजाति के परमान-पत्र जारी कर दे गीस।
📄 जांच मं निकरिस सच्चाई
अंबिकापुर SDO अउ परियोजना दफ्तर ले जांच कराय गे रहिस, जेमां पता चलिस कि परमान-पत्र देय के टाइम कागज कम रहिन। यानि जांच मं खुद प्रशासन ह बताइस कि वैध दस्तावेज नई मिलिस।
🏛️ हाईकोर्ट कहिस — कारवाही करव, फेर प्रशासन काबर सुते हावे
आदिवासी समाज ह ये मामला ला बिलासपुर हाईकोर्ट मं ले गे रहिस। 17 जून 2025 मं कोर्ट ह साफ आदेश देहिस — जिला अउ राज्य स्तर के समिति जांच करे अउ कारवाही करव। फेर चार महीना गुजर गे —ना कारवाही, ना निरस्तीकरण। ए बात ले समाजिक संगठनों मं भारी नाराज़गी हावे।

📅 नोटिस भेजे गीस — विधायक नई आइन सुनवाई मं
जिला स्तर के समिति ह 28 अगस्त,15 सितंबर अउ 29 सितंबर 2025 मं नोटिस भेजिस। विधायक ला कागज दिखाय बर कहे गीस, फेर वो सुनवाई मं नई पहुंचिन।आदिवासी समाज ह कहिस — “अब वो जांच ले बचत हे, जवाब देय ले कतरात हे।”
🚨 आरोप — “फर्जी आदिवासी बनके चुनाव लड़े हे”
समाज के नेतागन कहिथें — “गलत परमान-पत्र के सहारे आरक्षित सीट ले चुनाव लड़ना, सच्चा आदिवासी के हक ल छीनना हावे।” एला समाज ह राजनीतिक धोखा कहिथे अउ कहिथे — “हमर भावना मं ठेस पहुंचाय गे हे।
⏰ समाज के अल्टीमेटम — 7 दिन मं कारवाही नई होइस, त आंदोलन
आदिवासी समाज ह प्रशासन ला 7 दिन के मोहलत देहे हावे। कहिस — “अगर ए टाइम मं जाति परमान-पत्र रद्द नई होइस, त अनिश्चितकालीन आंदोलन चालू होही।” समाज ह साफ कहिस — “अप्रिय स्थिति बनिस, त जिम्मेदारी प्रशासन के होही।”
🔥 अब गरमावत हावे सियासी माहौल
पूरा इलाका मं अब राजनीतिक गरमी बढ़ गे हावे। संगठन, समाज अउ नेता मन खुलके बोलत हवंय।विधायक पक्ष ले अभी तक कोई बयान बाहर नई आइस।
👀 आगू का होही?
अब सबके नजर जिला प्रशासन अउ सत्यापन समिति के ऊपर हावे। अगर परमान-पत्र निरस्त होइस, त मामला विधानसभा सदस्यता तक पहुंच सकथे। फेर अगर वैध ठहराय गीस, त विरोधी पक्ष नवां कानूनी लड़ई मं उतरही।
Author: mantantra24





