नईगढ़ी में भ्रष्टाचार का नंगा नाच: सड़क निर्माण में लाखों की लूट, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल!
ब्यंकटेश कुमार तिवारी/ मऊगंज – नईगढ़ी जनपद की ग्राम पंचायत मौहरिया में सड़क निर्माण में हुआ भ्रष्टाचार ग्रामीण विकास की नींव को खोखला करने का एक और सबूत है। ₹24.95 लाख की लागत से बनने वाली 600 मीटर की पीसीसी सड़क में गंभीर अनियमितताओं ने न केवल सरकारी धन की बंदरबांट को उजागर किया है, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती और भ्रष्ट तंत्र की गहरी जड़ों को भी सामने लाया है। जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुल चुकी हैं, लेकिन दोषियों पर अब तक कार्रवाई न होने से जनता का गुस्सा भड़क रहा है। क्या यह भ्रष्टाचार किसी बड़े संरक्षण में पनप रहा है, या प्रशासन की लापरवाही इसे हवा दे रही है?
जांच में खुला भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा

20 जून 2025 को शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह, सरपंच, सचिव और स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में हुए निरीक्षण ने सड़क निर्माण की हकीकत को बेपर्दा कर दिया। श्यामलाल साकेत के घर से हरीशचंद्र गुप्ता (प्रधानमंत्री सड़क) तक बनी 360 मीटर की सड़क के 330 मीटर हिस्से में “वर्टिकल केक” निर्माण दोष पाया गया। यह दोष इस बात का पुख्ता सबूत है कि सड़क निर्माण में घटिया और अमानक सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, निर्माणाधीन 30 मीटर हिस्से में प्राक्कलन के विपरीत बालू की जगह डस्ट का उपयोग हुआ, जो गुणवत्ता मानकों का खुला उल्लंघन है। पहले ही 5 मई 2025 को उप यंत्री ने पंचायत को पत्र जारी कर घटिया सामग्री हटाने और गुणवत्तापूर्ण निर्माण की हिदायत दी थी, लेकिन पंचायत ने इस निर्देश को पूरी तरह नजरअंदाज किया। जांच में यह भी सामने आया कि प्रधानमंत्री सड़क के पास प्रस्तावित पुलिया के लिए ₹1.68 लाख की राशि आहरित की जा चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य का नामोनिशान तक नहीं है। इस राशि को तत्कालीन सरपंच सुग्गा सिंह और सचिव दिलीप पटेल से बराबर-बराबर वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है।
सात दिन का अल्टीमेटम: कार्रवाई या महज दिखावा?
जांच रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों ने पंचायत को सात दिन का अंतिम मौका दिया है। यदि इस अवधि में सुधार नहीं हुआ, तो वर्तमान सरपंच सीताराम पटेल और सचिव सुदर्शन साकेत से ₹15 लाख की वसूली की जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब भ्रष्टाचार इतने स्पष्ट रूप से सामने आ चुका है, तो अब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या ये जनप्रतिनिधि और अधिकारी किसी रसूखदार के संरक्षण में हैं? मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की सुस्त रफ्तार ने जनता के बीच आक्रोश को और भड़का दिया है। क्या यह सात दिन का अल्टीमेटम वास्तव में कार्रवाई की ओर ले जाएगा, या यह भी कागजी खानापूरी बनकर रह जाएगा?
शिकायतकर्ता की मांग: भ्रष्टाचार की गहरी जांच जरूरी

शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह ने इस मामले को और गंभीरता से उठाते हुए व्यापक जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के अलावा स्टाम्प डैंप, नाली निर्माण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, नदेव टांका और पंचायत भवन की मरम्मत जैसे कार्यों में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। उन्होंने इन सभी कार्यों की गहन जांच की मांग की है, ताकि भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर हो सकें। नरेंद्र सिंह ने यह भी खुलासा किया कि शिकायत करने वालों को धमकियां दी जा रही हैं, जो लोकतंत्र और पारदर्शिता के लिए गंभीर खतरा है। उनकी यह मांग ग्रामीण विकास के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक मजबूत कदम हो सकती है।
मऊगंज में भ्रष्टाचार का अड्डा
मऊगंज जिला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का पर्याय बनता जा रहा है। मौहरिया पंचायत का यह मामला कोई अपवाद नहीं है। जोरौट पंचायत में भी इसी तरह के भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे, जहां शिकायतकर्ता रामलल्लू प्रजापति ने कलेक्टर से कार्रवाई की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठा। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कब तक भ्रष्टाचार को संरक्षण मिलता रहेगा? क्या प्रशासन केवल अल्टीमेटम देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेगा, या फिर दोषियों को सजा देकर एक मिसाल कायम करेगा?
जनता की आवाज: जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग
मौहरिया का यह घोटाला केवल एक सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण विकास के लिए आवंटित धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही की कमी का प्रतीक है। ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी योजनाओं का पैसा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता है, तो विकास की उम्मीदें धराशायी हो जाती हैं। नरेंद्र सिंह जैसे जागरूक नागरिकों की शिकायतें और जांच में उजागर हुई सच्चाई इस बात का सबूत हैं कि भ्रष्टाचार अब खुलेआम हो रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन न केवल दोषियों से वसूली करे, बल्कि ऐसी सख्त कार्रवाई करे जो भविष्य में भ्रष्टाचार को हतोत्साहित करे।
सात दिन बाद क्या होगा?
अधिकारियों ने सात दिन का अल्टीमेटम देकर सुधार और वसूली की बात तो कही है, लेकिन क्या यह कार्रवाई वास्तव में होगी? या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? मऊगंज में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग अब जन आंदोलन का रूप ले रही है। यदि प्रशासन इस बार चूकता है, तो जनता का भरोसा और कमजोर होगा। यह समय है कि जिला प्रशासन न केवल दोषियों से वसूली करे, बल्कि ऐसी कार्रवाई करे जो भविष्य में भ्रष्टाचार को रोकने का सबक बने।
निष्कर्ष
नईगढ़ी की मौहरिया पंचायत में सड़क निर्माण घोटाला भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का ज्वलंत उदाहरण है। ₹24.95 लाख की लागत से बनने वाली सड़क में घटिया सामग्री और प्राक्कलन के उल्लंघन ने ग्रामीण विकास को ठगा है। शिकायतकर्ता नरेंद्र सिंह की हिम्मत और जांच में सामने आई सच्चाई के बावजूद, दोषियों पर कार्रवाई न होना निराशाजनक है। मऊगंज प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में कठोर कदम उठाए, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगे और जनता का विश्वास कायम रहे। सात दिन का समय शुरू हो चुका है—क्या इस बार प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, या भ्रष्टाचार की यह कहानी अधूरी रह जाएगी?
Author: mantantra24





