शासकीय गौशाला लौर कला में भ्रष्टाचार का गहरा दाग
प्रकाश द्विवेदी/ लौर – मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की शासकीय गौशाला लौर कला में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। कागजों पर 274 गौवंश रजिस्टर्ड हैं, लेकिन मौके पर केवल 74 ही मिले—बाकी गायब! यह स्थिति न सिर्फ सरकारी तंत्र की पोल खोलती है, बल्कि गौ माता की सेवा के नाम पर हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर करती है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गौशाला की हालत बदहाल है—छत टपक रही हैं, पशु पानी के लिए तरस रहे हैं, और देखभाल का नामोनिशान नहीं।
जमीनी हकीकत: उपेक्षा और अभाव

गौशाला में भूसा तो मौजूद है, लेकिन पानी की भारी कमी है। बीमार पशुओं के लिए कोई इलाज या देखभाल की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि गौशाला ज्यादातर समय ताले में बंद रहती है, और पशु सड़कों पर भटकते नजर आते हैं, जिससे हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। छत से पानी टपकता है, लेकिन प्यासे पशुओं के लिए पीने का इंतजाम नहीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि जब कोई गौ सेवक बीमार गाय का इलाज कराने लाता है, तो संचालक कहते हैं, “यह लाश रखने के लिए गौशाला नहीं है,” और उन्हें वापस लौटा दिया जाता है।
आर्थिक अनियमितताएं अपने चरम पर
गौशाला में प्रति गौवंश रोजाना 40 रुपये की दर से शासन द्वारा गौशाला संचालन के लिए राशि दी जाती है। 274 गौवंश के हिसाब से हर माह लगभग 3 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी होती है। लेकिन इस पैसे का उपयोग पशुओं की सेवा में नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है। फर्जी रजिस्टर, फर्जी फीडिंग रिकॉर्ड, और अधूरे निर्माण कार्यों का झूठा दावा—सब कुछ कागजों तक सीमित है। छह साल से अधूरे पड़े निर्माण कार्यों की अनदेखी बताती है कि जिम्मेदारों की लापरवाही कितनी गहरी है।
शिकायतें बेअसर, कार्रवाई नाम मात्र की
स्थानीय लोगों ने कई बार शिकायतें कीं, लेकिन प्रशासन की ओर से सिर्फ खानापूर्ति हुई। जिला प्रशासन ने कुछ संचालकों को नोटिस दिए, पर जमीनी सुधार का कोई असर नहीं दिखा। पशुओं के लिए न छांव है, न चारा, न पानी—बस भ्रष्टाचार की मोटी परत नजर आती है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस गंभीर मसले पर सवाल उठाती है। लौर कला की यह स्थिति अकेली नहीं है। देवतालाव, नईगढ़ी, हनुमना, और मऊगंज जैसे अन्य क्षेत्रों में भी गौशालाओं का यही हाल है। कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के चलते गायें दम तोड़ रही हैं, और सरकारी योजनाएं फाइलों में सिमटी नजर आती हैं।
जरूरत है जवाबदेही की लेकिन अधिकारी बन बैठे धृतराष्ट्र
गौशाला लौर कला की दुर्दशा बताती है कि गौ सेवा के नाम पर सरकारी तंत्र विफल हो रहा है। असली जरूरत है दोषियों पर सख्त कार्रवाई, पारदर्शी जांच, और पशुओं के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करने की। जब तक सिस्टम में जवाबदेही नहीं आएगी, गौ माता के नाम पर यह भ्रष्टाचार यूं ही जारी रहेगा। जनता की आस्था और संवेदना को बचाने के लिए अब ठोस कदम उठाने की जरूरत है। देखते हैं अब कार्यवाही करने की हिम्मत प्रशासन जुटा पाता हैं या सिर्फ गाय के नाम पर राजनीति ही जारी रहती हैं!! देखे वीडियो
Author: mantantra24





