रायपुर में बिजली विभाग की लापरवाही का एक और काला अध्याय: 10 साल का मासूम झुलसा, CSEB की कारगुजारियों का सिलसिला जारी!

सुनील शर्मा/रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रावतपुरा कॉलोनी फेज-2 में शुक्रवार दोपहर एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसमें बिजली विभाग (CSEB) की घोर लापरवाही ने एक 10 साल के मासूम की जिंदगी खतरे में डाल दी। ऊपर से गुजर रहे जर्जर बिजली के तार अचानक टूटकर नीचे गिर गए, और खेल रहा मासूम बच्चा इसकी चपेट में आ गया। बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। इस घटना ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL), जिसे CSEB के नाम से जाना जाता है, की लापरवाही और गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर कर दिया है।
लंबे समय से अनसुनी शिकायतें, अब बनीं मासूम की जान की दुश्मन
स्थानीय निवासियों का कहना है कि रावतपुरा कॉलोनी में बिजली के लटकते और जर्जर तारों की शिकायत कई महीनों से की जा रही थी। लोगों ने CSEB को बार-बार इस खतरे से अवगत कराया, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिले। एक निवासी ने गुस्से में कहा, “हमने कई बार कहा कि तार टूटने वाले हैं, लेकिन बिजली विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया। आज हमारे बच्चे की जिंदगी खतरे में है, इसके जिम्मेदार CSEB के अधिकारी हैं!” इस हादसे के बाद कॉलोनी में रोष की लहर है, और लोग सड़कों पर उतरकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
CSEB की लापरवाही का पुराना इतिहास
यह पहला मौका नहीं है जब CSEB की लापरवाही ने लोगों की जिंदगी को खतरे में डाला हो। हाल के सालों में कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जो इस विभाग की गैर-जिम्मेदारी को दर्शाती हैं। अक्टूबर 2024 में रायगढ़ जिले के घारघोड़ा रेंज में 11KV की लटकती बिजली लाइन की वजह से तीन हाथियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस घटना में भी स्थानीय लोगों ने पहले ही बिजली विभाग को तारों की खराब स्थिति के बारे में चेतावनी दी थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जांच में CSEB की लापरवाही साफ उजागर हुई, और इसके बाद वन विभाग को दो अधिकारियों को निलंबित करना पड़ा, लेकिन बिजली विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुआवजे का झुनझुना, लेकिन जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना
ऐसी घटनाओं के बाद CSEB अक्सर मुआवजे का ऐलान तो कर देता है, लेकिन असल जिम्मेदारी लेने से बचता है। रायगढ़ की घटना में भी मुआवजे की बात हुई, लेकिन दोषी अधिकारियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। रावतपुरा कॉलोनी के इस हादसे में भी लोग मुआवजे से ज्यादा सिस्टम में सुधार की मांग कर रहे हैं। एक स्थानीय समाजसेवी ने कहा, “मुआवजा तो दे देंगे, लेकिन क्या इससे हमारे बच्चे की जिंदगी वापस आ जाएगी? CSEB को अपनी लापरवाही सुधारनी होगी, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।”

बढ़ते टैरिफ रेट्स: जनता की जेब पर डाका
CSEB की लापरवाही सिर्फ खराब रखरखाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जनता की जेब पर भी भारी पड़ रही है। जून 2024 में छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CSERC) ने बिजली दरों में औसतन 8.35% की बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी, जिसके बाद प्रति यूनिट 20 पैसे की बढ़ोतरी हुई। CSPDCL ने 4420 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे का हवाला देते हुए यह बढ़ोतरी की थी। लेकिन सवाल यह है कि जब बिजली विभाग बुनियादी सुविधाएँ देने में नाकाम है, तो टैरिफ बढ़ाकर जनता पर बोझ क्यों डाला जा रहा है? रावतपुरा कॉलोनी के एक निवासी ने तंज कसते हुए कहा, “हमसे ज्यादा पैसे लेते हैं, लेकिन तारों की मरम्मत तक नहीं करते। यह तो सीधा-सीधा डaka है!”
जनता की माँगें: अब और बर्दाश्त नहीं!
रावतपुरा कॉलोनी के इस हादसे ने लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। स्थानीय पार्षदों और समाजसेवियों ने CSEB के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनकी माँगें साफ हैं:
दोषी अधिकारियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो, जिसमें निलंबन और कानूनी कदम शामिल हों।
कॉलोनी में सभी जर्जर तारों को तुरंत बदला जाए और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन हो।
भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए नियमित निरीक्षण और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।
CSEB की जवाबदेही कब?
यह हादसा CSEB के लिए एक और बड़ा सबक है, लेकिन सवाल यह है कि क्या अब भी विभाग अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करेगा? लापरवाही, अनसुनी शिकायतें, और बढ़ते टैरिफ रेट्स ने जनता का भरोसा तोड़ दिया है। रायपुर के इस मासूम बच्चे की जिंदगी अब एक उम्मीद पर टिकी है, लेकिन CSEB की गैर-जिम्मेदारी ने सैकड़ों परिवारों के दिलों में डर भर दिया है। अब वक्त है कि CSEB अपनी जिम्मेदारी निभाए, वरना जनता का गुस्सा और बड़ा आंदोलन बन सकता है।
Author: mantantra24







