कोरिया जिले के पोड़ी-बचरा में सालों पुरानी पानी की समस्या का अंत: स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत!

कोरिया जिले के पोड़ी-बचरा में सालों पुरानी पानी की समस्या का अंत: स्कूली बच्चों और ग्रामीणों को मिली बड़ी राहत!

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में एक बड़ी खबर सामने आई है, जो न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक मिसाल बन गई है। जिले की एक महत्वपूर्ण ग्राम पंचायत पोड़ी-बचरा, जहां सालों से तहसील,स्कूल,कॉलेज,कस्तूरबा आवासीय विद्यालय सहित प्री मैट्रिक आदिवासी बालिका छात्रावास में पानी की भारी किल्लत थी, वहां अब पानी की धारा बहने लगी है। यह बदलाव कोरिया की कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी और जल विभाग के अधिकारी आकाश पोद्दार के अथक प्रयासों का नतीजा है, जिन्होंने इस गंभीर समस्या को समझा और इसे हल करने के लिए ठोस कदम उठाए।

सालों की समस्या, अब जाकर मिला समाधान

पोड़ी-बचरा ग्राम पंचायत कोरिया जिले का एक ऐसा क्षेत्र है, जहां शिक्षा और प्रशासनिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यहाँ एक हाई स्कूल और कॉलेज है, जहाँ कक्षा 1 से लेकर कॉलेज तक के लगभग 950 बच्चे पढ़ते हैं। इसके ठीक बगल में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय है, जहाँ 200 से अधिक बच्चियाँ पढ़ाई करती हैं। पास ही प्री-मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में करीब 300 बच्चियाँ रहती हैं। इनके अलावा, यहाँ एक तहसील भी है, जहाँ हर दिन सैकड़ों ग्रामीण अपने काम से आते-जाते हैं। लेकिन इतनी महत्वपूर्ण जगह पर सालों से पानी की व्यवस्था न होना एक बड़ी विडंबना थी। स्कूल और छात्रावासों में न तो पीने का पानी था, न ही टॉयलेट की सफाई के लिए पानी की सुविधा। ग्रामीणों को भी तहसील में पानी की कमी से जूझना पड़ता था।

कलेक्टर और जल विभाग ने दिखाई संवेदनशीलता

इस गंभीर समस्या को देखते हुए कोरिया की कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी और जल विभाग के अधिकारी आकाश पोद्दार ने इस मुद्दे को प्राथमिकता दी। उन्होंने स्थानीय लोगों और स्कूल प्रशासन से बातचीत की, हालात का जायजा लिया और फिर एक ठोस योजना बनाई। उनकी कोशिशों का नतीजा यह हुआ कि लगभग आधे किलोमीटर की दूरी से पाइपलाइन बिछाकर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की गई। अब हाई स्कूल, कॉलेज, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, प्री-मैट्रिक छात्रावास और तहसील—सभी जगह पानी पहुँच रहा है।

बच्चों और ग्रामीणों को मिली राहत

इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यहाँ के स्कूली बच्चों को हुआ है। 950 बच्चों को अब पीने का साफ पानी मिल रहा है। स्कूल के टॉयलेट्स, जो पहले पानी की कमी से गंदे रहते थे, अब साफ-सुथरे हो गए हैं, जिससे बच्चों को स्वच्छ माहौल मिल रहा है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 200 से अधिक बच्चियों को भी पानी की दिक्कत से छुटकारा मिला है। प्री-मैट्रिक आदिवासी छात्रावास की 300 बच्चियाँ, जो पानी की कमी से रोज़ परेशान थीं, अब राहत की साँस ले रही हैं। तहसील में आने वाले सैकड़ों ग्रामीणों के लिए भी पीने के पानी की व्यवस्था हो गई है, जिससे उनकी एक बड़ी परेशानी दूर हुई है।

एक मिसाल बनी यह पहल

यह पहल न केवल पोड़ी-बचरा के लिए, बल्कि पूरे कोरिया जिले के लिए एक मिसाल है। सालों से चली आ रही पानी की समस्या को हल करके कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी और जल विभाग के आकाश पोद्दार ने यह दिखा दिया कि अगर इरादा पक्का हो, तो हर मुश्किल का हल निकाला जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह उनके लिए एक नई उम्मीद की किरण है, और अब उनके बच्चे बेहतर माहौल में पढ़ाई कर पाएँगे।

भविष्य के लिए एक संदेश

यह खबर सिर्फ पानी की आपूर्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक संदेश भी है कि संवेदनशील नेतृत्व और सही दिशा में किए गए प्रयास कितने बड़े बदलाव ला सकते हैं। पोड़ी-बचरा के बच्चों और ग्रामीणों की मुस्कान इस बात का सबूत है कि जब प्रशासन और जनता के बीच सही तालमेल होता है, तो हर समस्या का समाधान संभव है।
mantantra24
Author: mantantra24

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