चुनाव के समय में अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग नेताओं के लिए कोई नई बात नहीं है कभी-कभी यह प्रयोग सफल हो जाते हैं तो कभी-कभी यह पार्टी के लिए मुसीबत का भी कार्य करते हैं। अति उत्साही होकर ऊल-जलूल बयान बाजी करना,अपने आप को नेताओं का करीबी तो बना सकता है लेकिन उससे जनता के या यू कहे की वोटर के दिलों दिमाग पर क्या असर पड़ेगा यह कहना मुश्किल है। कुछ ऐसे ही भाषा का प्रयोग भाजपा के पूर्व मंत्री और बैकुंठपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी भैया लाल राजवाड़े के बारे में किया गया,जहा एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस के एक युवा नेता के द्वारा भैया लाल राजवाड़े को “दलालों का लाल” बोला गया। चुनावी संबोधन के दौरान बार-बार ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया और खास बात यह रही की उस संबोधन के कुछ मीटर की दूरी पर ही भाजपा की चुनावी सभा हो चुकी थी और भैया लाल राजवाड़े अपने सभी कार्यकर्ताओं के साथ इन सभी शब्दों को सुनकर मूक दर्शक की तरह बैठे रहे
वरिष्ठ कांग्रेसियों ने चुनावी सभा में पूर्व मंत्री को दिया सम्मान
युवा नेता के साथ मंच साझा करने आए कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओ ने शायद इस बात को समझ लिया और उसके बाद काफी गंभीरता से अपना भाषण दिया जिसमें उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि हम किसी का भी अपमान करना नहीं चाहते। मंच पर उपस्थित और भी कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने काफी सोच समझकर अपना भाषण दिया जिससे किसी की भावनाएं आहत न हो, लेकिन युवा नेता के द्वारा भाजपा के प्रत्याशी को “दलालों का लाल” कहना चुनावी समीकरण में कितना सटीक बैठेगा और उसका चुनाव पर क्या असर पड़ेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा।
दलालों के लाल का क्या है प्रमाण??
युवा नेता के द्वारा कही गई बात की भाजपा के प्रत्याशी भैया लाल राजवाड़े “दलालों के लाल हैं” इसका कोई भी प्रमाण वह मंच से नहीं दे पाए हैं और अगर पूर्व मंत्री के पिछले 10 साल के कार्यकाल को देखा जाए तो उन पर ऐसा कोई भी दलाली का इल्जाम अभी तक नहीं लग सका है जिससे की उन पर कोई दलाली की बात सिद्ध हुई हो,तो क्या युवा नेता के द्वारा भाजपा प्रत्याशी को दलालों का लाल कहना सिर्फ एक चुनावी स्टंट हैं?
अमर्यादित भाषणों से कांग्रेस प्रत्याशी को होगा फायदा या नुकसान??
भाजपा के प्रत्याशी भैया लाल राजवाड़े आम लोगों के काफी करीब माने जाते हैं जिस तरह से उनकी पैठ छोटे से लेकर गरीब परिवारों के बीच है और छेत्र में उनका जो व्यापक जानधार हैं उससे कहीं ना कहीं अगर भाजपा नेता लोगों से भावनात्मक अपील कर के यह समझाने में सफल हो जाते हैं की किस तरह से मेरे द्वारा की गई मदद को दलाली का नाम दिया जा रहा हैं तो युवा नेता का यह दाव कांग्रेस के लिए भारी भीं पड़ सकता हैं।
कई युवा दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी से बना रखी है दूरी
बैकुंठपुर विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी घोषित होने के बाद भी अभी तक कई युवा,दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी से दूरी बनाकर रखी हुई है। 2018 के चुनाव में अपना तन मन धन लगाकर बैकुंठपुर विधानसभा में कांग्रेस का परचम लहराने वाले दिग्गज नेताओं को,चुनाव जीतने के बाद जिस तरह से दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर निकाल कर पूरा कारोबार चंगु मंगू को सौप दिया गया और पिछले 5 वर्षों में हकदार कांग्रेस कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है शायद ये दिग्गज नेता अभी भी उस अवहेलना को भुला नहीं सके हैं इसलिए लगभग सभी कार्यक्रमों पर संगठन से जुड़े हुए अधिकांश कांग्रेसी नेता विधायक प्रत्याशी से दूरी ही बनाए हुए हैं।
अब ऐसे में युवा नेता के द्वारा अमर्यादित भाषाओं का प्रयोग करना पार्टी के लिए कितना लाभकारी साबित होगा यह तो आने वाला परिणाम ही बताएगा…..
Author: mantantra24





