छत्तीसगढ़ में चुनाव नजदीक है मुख्यमंत्री अपने पूरे अमले के साथ जगह जगह पर सरकार के द्वारा किए गए कार्यों और योजनाओं की जानकारी दे रहे हैं। निश्चित तौर पर ऐसा करना भी चाहिए पर शायद स्वास्थ्य विभाग उनके हौसलों को तोड़ने में कोई कोर कसर नहीं रख रहा है,सुनिए पत्रकार और पीड़ित के बीच की बातचीत…
एक महिला जो प्रसव पीड़ा से रात भर डॉक्टर के सामने गिड़गिड़ाती रही,इलाज कराने के लिए दर्द से कराहती रही, मिन्नते मांगती रहीं और उसी समय पर उस महिला का फौजी पति सीमा पर देश की सुरक्षा में लगें रहे लेकिन तब भी उस डॉक्टर के द्वारा महिला को इलाज तो नहीं लेकिन ताने जरूर सुनाए गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गर्भवती महिला जो कि विश्रामपुर में स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली चार पहिया वाहन 108 में कार्यरत है अपने गर्भावस्था के दौरान उस महिला ने अपना इलाज अंबिकापुर के एक निजी अस्पताल पर जारी रखा। महिला के अनुसार जब वह अपने मायके कोरिया जिला के मनसुख में आई हुई थी प्रसव का समय नजदीक आने पर जब दिनांक 3/8/2023 को प्रसव पीड़ा काफी तेज हो जाती है तो वह जिला अस्पताल बैकुंठपुर पहुंचती है जहां पर उसके द्वारा डॉक्टरों से इलाज करने की विनती की जाती है लेकिन ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के द्वारा बार-बार यही कहा जाता है कि जब तुमने अपना इलाज एक निजी अस्पताल से करवाया है तो वहीं क्यों नहीं चली जाती यहां पर कुछ नहीं हो पाएगा। वह महिला बार-बार उस डॉक्टर से विनती करती है समय अधिक होने का हवाला देती हैं लेकिन शायद उस डॉक्टर की संवेदना भी एनीथिसिया के समान शुन्य हो जाती है और उस गर्भवती महिला कि कोई मदद नहीं की जाती।
कांग्रेस के नेताओं से भी लगाई थी मदद की गुहार
प्राप्त जानकारी के अनुसार महिला ने रात्रि में युवा कांग्रेस नेता को भी कॉल किया था और कांग्रेस नेता के द्वारा डॉक्टर से बात करने की बात भी कही गई थी। लेकिन महिला के अनुसार उसे किसी भी तरह की मदद नहीं मिली नतीजतन महिला को उसी पीड़ा में वापस घर आना पड़ता है। अगर कांग्रेस नेता की माने तो उन्होंने डॉक्टर से बात की थी मदद करने की बात भी कही थी लेकिन अगर महिला को किसी भी तरह की सहायता नहीं मिली तो क्या कांग्रेस सरकार में अब डॉक्टर या यूं कहें की स्वास्थ्य अमला भी कांग्रेस नेताओं की बात नहीं सुन रहा है जबकि यह क्षेत्र स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंह देव के संभाग में आता है।
महिला ने लगाई पत्रकार से मदद की गुहार
जब प्रसव पीड़ा से तड़पती हुई महिला की बात किसी ने नहीं सुनी तो उन्होंने पत्रकार से संपर्क कर अपनी पूरी पीड़ा को साझा किया और बताया कि किस तरह से मेरे पति देश की सीमा पर खड़े हैं और मैं खुद भी स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत काम करती हूं लेकिन जब मेरी भी कोई नहीं सुन रहा है तो एक गरीब व्यक्ति कि कौन सुनेगा,मेरी मदद की जाए
जब इस मसले पर मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी बैकुंठपुर से बात की गई तो उन्होंने इस पूरे मामले पर अपना खेद और संवेदनाएं जताते हुए तत्काल ही उस महिला के उचित स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए निर्देशित किया।
इन सभी घटनाक्रमों से आप समझ सकते हैं कि किस तरह से स्वास्थ्य मंत्री और उपमुख्यमंत्री के क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल है। कागजों पर बड़ी-बड़ी बातें की जाते हैं स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने की दुहाई दी जाती है लेकिन बार-बार स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खुल ही जाती है,गरीब परेशान होते हैं और न जाने ऐसी कितनी मौतें हो जाती हैं जिसकी जवाबदारी कोई नहीं लेता,पता नहीं चलता कि आखिर इन गरीबों के मौत का जिम्मेदार कौन है। चुनाव नजदीक है नेता आपके द्वार जरूर आएंगे और आपसे वोट भी मांगेंगे लेकिन जनता एक बार फिर से पार्टियों में बटी हुई दिखेगी,पार्टी के नाम का पट्टा उनके गले में आपको जरूर देखने को मिलेगा। जाति और धर्म के नाम पर फिर चुनाव होंगे और ऐसे मुद्दे जिन पर खुलकर बात होनी चाहिए,ऐसे मुद्दे जिनसे लोगों की जिंदगी जुड़ी हुई होगी,एक बार पुन: दरकिनार कर दिए जाएंगे।
Author: mantantra24





