आत्मानंद स्कूल के बच्चों को ट्यूशन न पढ़ाए शिक्षक अगर पढ़ाया तो शिक्षक की कर देंगे छुट्टी – तुगलकी फरमान जारी?

सुनील शर्मा कोरिया:- स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल की लोकप्रियता किसी से छुपी नहीं है आलम यह है कि जिस भी स्थान पर इस स्कूल का संचालन होता है वहां आसपास के प्राइवेट स्कूलों से माता पिता अपने बच्चों का नाम कटवा कर स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला कराने की पूरी कोशिश करते हैं।
आपने कई बार सुना होगा की स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में दाखिला कराने के लिए नेतागिरी की गई, बड़े बड़े अधिकारियों से दबाव बनाने की कोशिश की खबरें भी बाहर आती रही हैं कुछ दिनों पहले कांग्रेस ने भी कहा था की केंद्रीय मंत्री रेणुका सिंह भी किसी अपने का दाखिला स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल में कराने की कोशिश की थी।
इन्हीं सभी लोकप्रियता के बीच में एक खबर जो बाहर आने को बेताब है कि एक निजी स्कूल के संचालक ने आत्मानंद स्कूल की लोकप्रियता से छुब्ध होकर अब एक अजीब सा निर्णय लिया है और आश्चर्य कि बात ये हैं कि उक्त निजी स्कूल के संचालक भी कांग्रेस पार्टी के नेता हैं। उनके इस निर्णय से स्पष्ट हैं कि वे अपने मुखिया से कितना नाराज होंगे, तो अब जनता को समझ ही जाना चाहिए की राजनीति जनता के हितों के लिए नहीं बल्कि अपने हितों को साधने के लिए की जाती हैं।

आत्मानंद स्कूल के बच्चों को ट्यूशन नहीं पढ़ाएंगे निजी स्कूल के शिक्षक

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक निजी स्कूल के संचालक ने निर्णय लिया है कि उनके स्कूल से नाम कटा कर और जो भी विद्यार्थी स्वामी आत्मानंद स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहा है उसे उस निजी स्कूल के शिक्षक प्राइवेट ट्यूशन नहीं पढ़ा सकते हैं। अगर कोई भी शिक्षक आत्मानंद स्कूल के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता हुआ पाया जाता है तो उसे स्कूल से निकाल दिया जाएगा। आप सभी को पता होगा कि निजी स्कूलों में कार्य करने वाले शिक्षकों का वेतन कितना कम होता है ऐसे में वे शिक्षक प्राइवेट ट्यूशन से शिक्षा देकर अपने आय में कुछ इजाफा करने की कोशिश करते हैं तो उक्त निजी स्कूल के संचालक के द्वारा ऐसा विरोधाभासी या यूं कहें कि तुगलकी फरमान जारी करना कहां तक सही है।

निजी स्कूल के संचालक को इतना डर क्यों?? 

कम समय में ही स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल ने जिस तरह से पूरे प्रदेश में भौकाल सा मचाया हुआ है उससे कहीं ना कहीं निजी स्कूल के संचालक में भविष्य को लेकर एक डर उत्पन्न कर दिया है। आप सभी जानते हैं कि शिक्षा और स्वास्थ्य हर एक व्यक्ति का मौलिक अधिकार होता है उसी शिक्षा और स्वास्थ्य का जो व्यवसायीकरण हुआ है उससे शिक्षा और स्वास्थ्य एक आम आदमी की पहुंच से गायब सा होता जा रहा है। महंगी शिक्षा और महंगी स्वास्थ व्यवस्था ने एक आम इंसान की कमर तोड़ रखी है उसी के फलस्वरूप जब स्वामी आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल जैसा स्कूल संचालन में आता है तो आम इंसान का रुझान उसकी ओर दौड़ा चला जाता है शायद यही कारण है कि स्वामी आत्मानंद स्कूल की लोकप्रियता और निजी स्कूलों से कम होते हुए बच्चों के डर ने उक्त निजी स्कूल के संचालक को ऐसा निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया होगा।

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Author: mantantra24

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