हमने अपनी जान भी दे दी और आपको मजा भी नहीं आया जनाब:- बेजुबान मुर्गे और बकरे
छत्तीसगढ़ प्रदेश में अभी आने वाले समय में चुनाव है, जिसकी तैयारियां सभी पार्टियां अभी से कर रहीं हैं। आपने देखा होगा कुछ दिनों पहले मनेंद्रगढ़ विधानसभा के विधायक विनय जायसवाल ने अपने जन्मदिन के बहाने बकरा पार्टी का आयोजन किया था वह आयोजन काफी हद तक सफल कहा जा सकता है,जिस तरह से उस आयोजन में भीड़ उमड़ी थी उससे कहीं ना कहीं विधायक विनय जायसवाल खुश जरूर होंगे।
उसी की तर्ज पर आज तहसील पोड़ी बचरा पर भी बकरा और मुर्गा पार्टी का आयोजन किया गया था,जिसमें आसपास के विधानसभा पर आने वाले 33 ग्राम पंचायतों को भी निमंत्रित किया गया था,लेकिन जिस तरह से 33 बकरों और 400 किलो मुर्गों का बलिदान दिया गया वह कहीं से भी सिद्ध होता दिखाई नहीं दे रहा है जिस तरह से भीड़ की उम्मीद विधायक महोदया ने की थी उस तरह की भीड़ पूरे कार्यक्रम से नदारद दिखी।
क्या चुनाव जीतने का पैमाना अब सिर्फ बकरा और मुर्गा पार्टी होगा या विकास भी मायने रखेगा
जिस तरह के कार्यक्रम चुनावी वर्ष पर अमूमन सभी पार्टियां करती हैं उसी तर्ज पर कार्यक्रम आज तहसील पोंडी बचरा पर भी रखा गया,लेकिन जिस तरह से जनता ने खासकर साहू समुदाय और आदिवासी समुदाय ने इस कार्यक्रम से किनारा किया उससे कहीं ना कहीं यह बात स्पष्ट लगती है की जनता अपना अपना वोट बकरा पार्टी,मुर्गा पार्टी पर नहीं विकास पर देना चाहती हैं।
पिकअप और छोटे हाथी जैसे वाहनों से ग्रामीणों को लाया गया कार्यक्रम स्थल
जिस तरह से पोड़ी बचरा क्षेत्र में व्यापक और भव्य तरीकें से इस बकरा पार्टी का आयोजन किया गया था उसके उलट ग्रामीणों ने कोई विशेष रुचि इस कार्यक्रम में नहीं दिखाई,फलस्वरूप ग्रामीणों को छोटे हाथी और पिकअप जैसे वाहनों में भर भर कर कार्यक्रम स्थल पर लाया गया और भीड़ दिखाने की कोशिश की गई उससे कहीं ना कहीं यह लगता है कि ग्रामीण इस भीषण गर्मी में मुर्गा और बकरा खाकर अपना पेट जरूर खराब नहीं करना चाह रहें थे।

कई ग्राम पंचायत सरपंचों और भूतपूर्व सरपंचों की नाराजगी भी आई सामने
छेत्र में इतने बड़े और भव्य बकरा और मुर्गा पार्टी का आयोजन किया गया था जिसकी पर्याप्त सूचना ना ही ग्रामीणों को थी वरन इसके उलट कई गावों के वर्तमान और भूतपूर्व सरपंचों ने भी इस कार्यक्रम के बारे में कोई जानकारी ना होने का हवाला दिया।
कुछ वर्तमान और भूतपूर्व सरपंचों ने नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि इस क्षेत्र पर इस तरह का आयोजन किया जा रहा है और किसी भी तरह की जानकारी हमको नहीं दी गईं हैं हैं इससे कहीं ना कहीं वर्तमान और भूतपूर्व सरपंचों में भी आक्रोश का माहौल देखा जा सकता था।
तो आप समझ ही सकते हैं जिस उद्देश्य से इस बकरा और मुर्गा पार्टी का आयोजन किया गया था वह कहीं ना कहीं पूर्णता सफल होता दिखाई नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों ने भी जताई आपत्ति,दिन भर चलता रहा तर्को का सिलसिला
ग्रामीणों से बात करने पर पता चला कि जिस तरह से 33 बकरों और 400 किलो की पार्टी चल रही है इसके बदले विधायक कोई धार्मिक या सामाजिक कार्यक्रम कराते तो इस कार्यक्रम का आनंद दोगुना होता। पोड़ी बचरा क्षेत्र पर अभी तक नेताओं के द्वारा लगातार धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन कराया जाता रहा है,लेकिन जिस तरह से इस बकरा पार्टी का आयोजन किया गया उससे कहीं ना कहीं महिलाओं सहित परिवारिक पुरुषों ने भी अपनी दूरियां बना ली।
वरिष्ठ कांग्रेसी सहित यूथ कांग्रेस ने भी किया इस कार्यक्रम से किनारा
जैसा कि हमने आपको पहले ही बताया था की बैकुंठपुर विधानसभा में गुटबाजी चरम पर हैं और उसी का परिणाम आज के कार्यक्रम पर देखने को मिला,जिसमें कई वरिष्ठ कांग्रेसियों ने अपनी दूरी बनाना ही सही समझा।
उसके साथ साथ युवा कांग्रेस ने भी इस बकरे और मुर्गा पार्टी में अपने आप को इस कार्यक्रम से दूर रखा।
आखिर इतने बड़े कार्यक्रम का फंड आया कहां से!!!
दबी जुबान पर कई लोगों और कई ग्रामीणों के द्वारा यह भी बोला गया इस बकरा और मुर्गा पार्टी का आयोजन तो इतने विराट रूप पर पूरे पोड़ी बचरा छेत्र पर किया गया,परंतु इस बड़े कार्यक्रम का फंड किसने जारी किया।
सोचने वाली बात जरूर है कि अगर इस तरह से इतने व्यापक और भव्य तरीके से सार्वजनिक रूप में इतना बड़ा आयोजन बिना किसी खास दिवस पर किया जाता है तो उसकी फंडिंग उसका पैसा कहां से आया होगा,क्या यह पैसा जनता का होगा या किसी खास पार्टी समर्पित व्यक्ति ने ऐसे आयोजन में गुप्त दान किया होगा इसकी जानकारी सार्वजनिक तो होनी ही चाहिए।
हमें लगता है की जनता भी समझदार हो गई होगी और इस चुनावी मौसम पर बकरे और मुर्गा पार्टी से दूरी बना कर अपना पेट नही खराब करना चाह रही होगी,शायद इसी लिए महिलाओं और ग्रामीणों ने इस खास चुनावी मसालों से तैयार बकरा पार्टी में अपनी खास दिलचस्पी नहीं दिखाई।
Author: mantantra24





