
साय ने थामा हाथ भाजपा से हुआ मोहभंग
दो बार के सांसद और तीन बार के भारतीय जनता पार्टी से विधायक नंदकुमार साय ने भारतीय जनता पार्टी को छोड़ कांग्रेस का हाथ थाम लिया है रविवार को उनके इस्तीफे के बाद यह संभावनाएं प्रबल बताई जा रही थी कि कहीं ना कहीं नंदकुमार साहू कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं और हुआ भी कुछ ऐसा ही एक दिनों के अंतराल पर ही नंद कुमार साय ने भाजपा को छोड़ते हुए कांग्रेस का हाथ थाम लिया है और जाते-जाते उन्होंने भाजपा पर इल्जाम भी लगाया है कि उनके सहयोगी साजिश रच रहे थे और उनकी छवि को खराब करने के झूठे आरोप लगाए जा रहे थे जिससे व्यथित होकर मैं भाजपा के सभी पदों से इस्तीफा देता हूं
लेकिन ऐसा क्या हो गया की पिछले महीने तक कांग्रेस को कोसने वाले और जब तक कांग्रेस की सरकार नहीं चली जाएगी तब तक मैं अपने बाल नहीं कटवाऊंगा कहने वाले नंदकुमार साय अचानक से चंद दिनों पर ही पार्टी से किनारा कर लेते हैं और जिस पार्टी ने उन्हें लगातार विधायक और सांसद बनाया,जिस पार्टी ने नवंबर 2000 में उन्हें छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष का पहला नेता बनाया,उन्हीं से गुस्सा हो जाते हैं और पार्टी छोड़ देते हैं और जाते हैं उसी पार्टी पर जिस ने उन पर कई आरोप लगाए हैं
कुछ दिनों पहले जब जब नंद कुमार साय के बहू के द्वारा उन पर इल्जाम लगाया गया तो कांग्रेस ने कहा था की नंद कुमार साय जैसे आदिवासी नेता को यह कृत्य शोभा नहीं देता|
वैसे कभी भी कांग्रेस नंदकुमार साय पर उतनी हमलावर नहीं रही है जितना कि वह अन्य भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर होती है जिस तरह से चुनावी वर्ष पर सरगुजा क्षेत्र से एक बड़े कद्दावर आदिवासी नेता ने पार्टी छोड़ी है उससे कहीं ना कहीं भाजपा को नुकसान होना तय माना जा रहा है
जिस तरह से अभी के समय पर सरगुजा क्षेत्र से 12 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है और जिस तरह से इन सभी सीटों पर कांग्रेस के टी एस सिंहदेव का असर माना जाता है और उनकी नाराजगी जिस तरह से अभी भी कांग्रेस से बनी हुई है इसका फायदा कहीं ना कहीं भाजपा उठाना चाहती थी परंतु अब निश्चित तौर पर उससे भाजपा के अरमानों पर थोड़ा पानी जरूर फिरा होगा
अब देखना होगा जिस चुनावी वर्ष पर टी एस सिंहदेव कांग्रेस से खफा नजर आ रहे हैं तो नंदकुमार साय को कांग्रेस में शामिल करके क्या कांग्रेस ने सरगुजा क्षेत्र पर आने वाली 12 विधानसभा सीटों पर टी एस सिंहदेव की नाराजगी से होने वाले नुकसान को कम कर पाएंगे या नहीं
लेकिन छत्तीसगढ़ के लिए या दूसरी बड़ी घटना है जब भाजपा के किसी बड़ी नेता ने भाजपा छोड़ी है इससे पहले स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी की भतीजी ने पार्टी की कार्यप्रणाली से खफा होकर पार्टी छोड़ी थी और उसके बाद नंद कुमार साय ने पार्टी छोड़ी है
इन सभी घटनाक्रमों के बीच लेकिन एक सत्य जो उभर कर आ रही है की निश्चित तौर पर नंद कुमार साय जैसे आदिवासी नेता को कांग्रेस की सदस्यता दिला कर भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय स्तर पर अपना कद जरूर बढ़ा लिया है
Author: mantantra24



